कृषि विभाग बैठाये मौसम विज्ञान केन्द्र के साथ तालमेल

 

इस स्तंभ के माध्यम से मैं यह कहना चाहता हूँ कि जिले में कृषि विभाग का कार्यालय होने के बाद भी इसका अपेक्षित फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा है।

इस विभाग के द्वारा न तो किसानों के हित में समय पर कोई एडवायजरी जारी की जाती है और न ही अन्य किसी समय पर उन्हें ऐसी कोई सलाह दी जाती है जिससे कृषक अपने आप को संभावित नुकसान से बचा सकें। हाल ही मेें भारी बारिश का दौर बीता और मॉनसून बीत जाने के बाद अभी भी पानी बरसता ही जा रहा है लेकिन कृषि विभाग का तालमेल मौसम विभाग से न होने के कारण जिले के किसानों को यह पता ही नहीं चल पाता है कि उन्हें आने वाले समय में किस तरह से तैयार रहना चाहिये।

जून आरंभ होने के बाद से बारिश के भी आसान नज़र आने लगते हैं लेकिन इस बार जून तो क्या, आधे से ज्यादा जुलाई का महीना भी सूखा चला गया लेकिन किसानों की आवश्यकता के अनुरूप बारिश नहीं हुई। इस दौरान कई किसानों की बोवनी खराब होती रही जिससे उन्हें आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा।

जुलाई के अंतिम सप्ताह के आखिरी दिनों में बारिश आरंभ हुई जो सितंबर तक जारी रही। इस दौरान हुई भारी बारिश ने किसानों को हतप्रभ करके रख दिया। आरंभ में अल्प वर्षा की आशंका होने के कारण किसानों ने मक्का बो दिया जिसकी फसल कई स्थानों पर भारी बारिश के कारण तबाह हो गयी। यदि कृषि विभाग के द्वारा मौसम विभाग से बारिश का पूर्वानुमान ले लिया जाता तो संभव था कि उसके द्वारा जिले के किसानों को सलाह दे दी जाती कि उन्हें कौन सी फसल की खेती लेना फायदेमंद रहेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

धान की पैदावार लेने वाले कृषक जरूर इस दौरान फायदे में दिखे लेकिन हाल ही में होने वाली बारिश ने उन्हंे भी परेशानी में डाल दिया क्योंकि कई स्थानों पर फसल कटने की स्थिति में है लेकिन बारिश ने परेशानी बढ़ा दी है। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि उसके द्वारा कृषि विभाग को इस बात के लिये पाबंद किया जाये कि चूँकि यह क्षेत्र फसल के मामले में बारिश पर ज्यादा निर्भर है इसलिये कृषि विभाग के द्वारा समय-समय पर मौसम विभाग से पूर्वानुमान लिया जाकर उससे किसानों को अवगत कराया जाये ताकि किसान समय के अनुसार फसल बो सकें।

अयोध्या प्रसाद