बिना इजाजत कैसे निकल गया शिलालेख!

 

 

ब्हाय रोगी प्रभाग की शिलान्यास पट्टिका हुई गायब!

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। जनता के बीच लोकप्रिय रहीं कुशल और कड़क प्रशासक की छवि वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा के द्वारा अस्सी के दशक में जिले को दी गयी प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी जिला अस्पताल के ब्हाय रोगी प्रभाग के शिलान्यास का शिलालेख ही अपने स्थान से नदारद है और उनके नाम पर सियासत करने वाले काँग्रेस के नेताओं ने अब तक अपना मौन नहीं तोड़ा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सुश्री विमला वर्मा के द्वारा अस्सी के दशक में सिवनी जिले को चार सौ बिस्तर वाले एक वृहद अस्पताल की सौगात दी गयी थी। उस समय यह अस्पताल आर्युविज्ञान महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज़) से संबद्ध अस्पताल की अर्हता वाला अस्पताल भी माना जाता था।

काँग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि सुश्री विमला वर्मा के बिना सिवनी और सिवनी के बिना सुश्री विमला वर्मा की कल्पना करना बेमानी ही होगा। उनके द्वारा जिले को दी गयी अनेक सौगातें आज भी उनकी याद दिलाती रहती हैं।

उक्त नेता का कहना था कि सुश्री विमला वर्मा के अवसान के उपरांत उन्हें बिसारने का तानाबाना काँग्रेस के स्थानीय नेताओं के द्वारा बुना जा रहा है, वरना क्या कारण है कि 16 मई को उनके अवसान के उपरांत उन्हें स्ट्रेचर धकेलने के लिये एक अदद वार्ड ब्वाय के न मिल पाने के बाद भी काँग्रेस के जिम्मेदार पदाधिकारियों के द्वारा इस बात की जाँच करवाने के लिये एक पत्र लिखने तक की जहमत नहीं उठायी गयी है, जबकि उनके पार्थिव शरीर को ले जाने वाले स्ट्रेचर को जिला काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राज कुमार खुराना ने भी धकेला था।

उक्त नेता का कहना था कि जिला अस्पताल में दो शिलालेख लगे हुए थे, इनमें से एक शिलालेख को वहाँ से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों के जरिये उन्हें यह पता चला कि अस्पताल प्रशासन के द्वारा इस शिलालेख को हटाये जाने के मामले में ठेकेदार से बात करने की बात कही गयी है। इसका तात्पर्य यही है कि यह पत्थर अस्पताल प्रशासन की जानकारी के बिना ही हटाया गया है!

उक्त नेता का कहना था कि उनकी जानकारी में यह भी लाया गया है कि अस्पताल के कायाकल्प के दौरान किसी श्रृमिक के द्वारा इस शिलालेख को खराब कर दिया गया था, जिसके बाद इसे कागज से ढांक दिया गया था और इसके बाद इसे वहाँ से पूरी तरह से हटा दिया गया है। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि ज्यादा शोर शराबा होने पर अब नया शिलालेख बनाकर यहाँ लगवा दिया जाये तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये, जबकि इस पुराने शिलालेख के साथ क्या हुआ, इस बात की जाँच कराये जाने की माँग काँग्रेस के नेताओं को की जाना चाहिये।

उन्होंने कहा कि सुश्री विमला वर्मा के द्वारा अपने व्यय पर बनायी गयी इंदिरा गांधी की कांस्य प्रतिमा को अस्पताल में स्थापित करवाने के लिये उन्हें ही भारी मशक्कत करना पड़ा था। अंततः उनके अवसान के बाद ही यह प्रतिमा अस्पताल में लग पायी है। इसके साथ ही सुश्री विमला वर्मा की प्रतिमा को भी अस्पताल में लगाया जाना चाहिये।

उनका कहना था कि इतनी बड़ी बात होने के बाद भी जिला और नगर काँग्रेस कमेटी के नेताओं के द्वारा इस मामले में अब तक एक विज्ञप्ति तक जारी नहीं किया जाना इस बात का द्योतक है कि उन्हें काँग्रेस के कद्दावर दिवंगत नेताओं की कितनी परवाह रह गयी है।