इसलिये भी मनायी जाती है दीपावली

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। इस बार दीपावली का पावन त्यौहार 27 अक्टूबर को देशभर में मनाया जायेगा। हिंदू धर्म में मनाये जाने वाले सभी त्यौहारों में से दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्व है।

वैसे तो माना जाता है कि ये त्यौहार भगवान श्रीराम के वनवास पूरा करके लौटने की खुशी में मनाया जाता है, लेकिन ये त्यौहार केवल भगवान राम के कारण से नहीं बल्कि इसके कई पौराणिक कारण हैं, जिसके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं। तो चलिये हम आपको बताते हैं ऐसे किन-किन कारणों से दीपावली मनायी जाती है।

देवी लक्ष्मी का जन्मदिन : माना जाता है कि इस दिन राक्षसों और देवताओं द्वारा समुद्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी क्षीर सागर ये कार्तिक महीने की अमावस्या को ब्रह्माण्ड में आयीं थीं। इसी वजह से यह दिन माता लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दीपावली के त्यौहार के रूप में भी मनाया जाता है।

भगवान विष्णु ने लक्ष्मीजी को बचाया था : हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक महान दावन राजा बाली हुआ करता था। वह तीनों लोकों पर राज करना चाहता था। उसे भगवान से असीमित शक्तियों का वरदान हासिल था, लेकिन भगवान विष्णु ने राजा बाली से तीनों लोकों को बचाया था और माता लक्ष्मी को उसकी जेल से भी छुड़ाया था, तभी से ये दिन बुराई (रावण) पर भगवान (मर्यादा पुरूषोत्तम रामचंद्रजी) की जीत और धन की देवी लक्ष्मी को बचाने के रूप में मनाया जाता है।

राज्य में हुई थी पाण्डवों की वापिसी : महाभारत के अनुसार इस दिन पाण्डव 12 साल बाद कार्तिक महीने की अमावस्या को अपने राज्य में लौटे थे। कौरवों से जुए में हारने के बाद उन्हें 12 सालों के लिये निष्काषित कर दिया गया था।

विक्रमादित्य का हुआ था राज्याभिषेक : इस दिन राजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ था, तब से लोगों ने दीपावली को ऐतिहासिक रूप से मनाना आरंभ कर दिया।

जैनियों का होता है खास दिन : तीर्थंकर महावीर को इस खास दिन दीपावली पर ही निर्वाण की प्राप्ति हुई थी, जिसके उपलक्ष्य में जैनियों में यह दिन दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

मारवाड़ी और गुजराती लोगों का नया साल होता है दीपावली : हिंदू कैलेण्डर के अनुसार मारवाड़ी लोग अश्विन की कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन दीपावली पर अपने नये साल को हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। उसी तरह चंद्र कैलेण्डर के अनुसार गुजराती लोग भी कार्तिक के महीने के पहले दिन दीपावली के एक दिन बाद अपना नया साल मनाते हैं।

सिक्खों के लिये दीपावली इसलिये होती है खास : अमर दास जो सिक्खों के तीसरे सिक्ख गुरू थे, उन्होंने दीपावली को लाल – पत्र दिन के पारंपरिक रूप में बदल दिया। इस दिन सभी सिक्ख अपने गुरूजनों का आशीर्वाद पाने के लिये एक साथ मिलते हैं।