37 साल बाद दीपावली पर बना यह संयोग

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। दीपावली के दिन सूर्यदेव का दिन, चित्रा नक्षत्र और अमावस्या का लगभग 37 साल बाद बना महासंयोग माता महालक्ष्मी की कृपा बरसायेगा। साथ ही माँ काली की आराधना भी फलेगी। कार्तिक मास की चतुर्दशी 27 अक्टूबर को दीपावली धूमधाम से मनायी जायेगी।

मराही माता स्थित कपीश्वर हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी उपेंद्र महाराज ने बताया कि कार्तिक माह में वर्ष की सबसे अंधेरी रात को दीपावाली का मुख्य त्यौहार मनाया जाता है। हिंदू शास्त्रों के मुताबिक कोई भी पूजा बिना दीपक प्रज्ज्वलित किये पूरी नहीं मानी जाती है।

माँ होंगी प्रसन्न : उन्होंने बताया कि दीपावाली के दिन घर की अच्छी तरह से सफाई करें। विशेषकर मुख्य द्वार को बहुत अच्छी तरह से साफ करें। इसके बाद मुख्य द्वार पर हल्दी का जल छिड़कें। भगवान गणेश को दूब एवं घास और माँ लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पित करना चाहिये। ये वस्तुएं दोनों देवी – देवता को अत्याधिक प्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि घर के बाहर रंगोली अवश्य बनायें। रंगोली को शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार पर जूते और चप्पल बिल्कुल न रखें। रसोई में झूठे बर्तन बिल्कुल न छोड़ें। दीपावाली के दिन घर की रसोई में भी दीपक जलाया जाता है। इस दिन माँ अन्नपूर्णा की पूजा का विधान है।