जंगलों में हर साल एक हजार करोड़ की वनोपज सलई गोंद की चोरी

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। प्रदेश में वनोपज चोरी रोकने के तमाम प्रयास फेल साबित हो रहे हैं। हर जिले और प्रदेश की सीमा पर वनोपज नाके और उन पर भारी भरकम स्टाफ पदस्थ होने के बावजूद प्रदेश के जंगलों से हर साल करीब एक हजार करोड़ रुपए मूल्य की सिर्फ सलई गोंद चोरी हो रही है।

आदिवासियों या मजदूरों से 50 से 100 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी जाने वाली यह गोंद सऊदी अरब में दो हजार रुपए किलो बिकती है। इंदौर के कई व्यापारी सलई गोंद का व्यापार करते हैं। ज्यादा से ज्यादा गोंद निकालने के लिए पेड़ों को खरोंचा जाता है। इस गोंद से गूगल बनता है, जो पूजा-पाठ के अलावा दवाओं में काम आता है।

सलई गोंद का प्रदेश में बड़ा व्यापार है। खासकर मालवा अंचल में गोंद के लिए जंगलों में सलई प्रजाति के पेड़ को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ज्यादा गोंद निकालने के लिए पेड़ों की गैटलिंग (पेड़ के तने पर खरोंचना) की जाती है। इससे पेड़ के तने से ज्यादा पानी निकलता है, जो सूखकर गोंद बनता है। प्रदेश में इतने बड़े व्यापार का खुलासा फरवरी 2019 में तब हुआ, जब खंडवा में गोंद से भरा आयशर ट्रक पकड़ाया। यह माल खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर के जंगलों से लाया जा रहा था। जबकि इस क्षेत्र में सलई गोंद निकालना प्रतिबंधित है।

वैसे यह मालवा अंचल तक ही सीमित नहीं रहा है। प्रदेश के दूसरे हिस्सों से भी गोंद निकाली जा रही है। इसकी बड़ी मंडी इंदौर में है। जहां के व्यापारी मजदूर लगाकर गोंद निकलवाते हैं, जो 50 से 100 रुपए प्रति किलो में खरीदी जाती है। मुंबई के व्यापारी इंदौर से ये गोंद को 400 रुपए किलो में खरीदकर आगे भेजते हैं। सलई गोंद निकालने के बुरहानपुर, खरगोन और खंडवा में दो सौ से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

इंदौर में इकठ्ठा होता है स्टाक

आसपास के जिलों के जंगलों से निकाली जा रही सलई गोंद इंदौर में इकठ्ठी होती है। यहां व्यापारियों के गोदामों में दो सौ से पांच सौ क्विंटल गोंद का स्टाक मिल जाएगा। वन विभाग की टीम ने फरवरी में कार्रवाई के दौरान इंदौर के एक व्यापारी के गोदाम पर छापा मारा था और बाद में उसी को स्टाक सौंप दिया। इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि खंडवा वन वृत्त के तत्कालीन सीसीएफ को हटना पड़ा।

मंत्री ने माना हो रहा कारोबार

वनमंत्री उमंग सिंघार ने इस बात को स्वीकार किया है कि प्रदेश में सलई गोंद का अवैध कारोबार चल रहा है। उन्होंने खंडवा वनवृत्त के तत्कालीन सीसीएफ को हटाए जाने के संबंधित सवाल के जवाब में कहा कि सलई गोंद का पांच सौ करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार है, लेकिन अधिकारी कार्रवाई नहीं करते। इसीलिए खंडवा के तत्कालीन सीसीएफ को हटाया गया था। हालांकि मामले ध्यान में होने के बावजूद वन विभाग ने अब तक इस गतिविधि के खिलाफ अभियान नहीं छेड़ा है।