मौसम बदलते ही प्रवासी पक्षियों के आने का सिलसिला हुआ जारी

 

 

तापमान कम होते ही जिले भर में सुनायी देगा विदेशी मेहमानों का कलरव

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। मौसम में जैसे – जैसे सर्दी बढ़ रही है, वैसे ही प्रवासी परिंदे आ रहे हैं। शहर की जलवायु सरहद पार के परिंदों को पसंद आती है। दलसागर, भीमगढ़, रूमाल सहित अनेक जलाशयों में सर्दी भर इन विदेशी मेहमानों की अठखेलियां देखकर लोग रोमांचित होते हैं।

नेचर एक्सपटर््स के अनुसार जिले में दलसागर तालाब, बबरिया तालाब, भीमगढ़ बांध, रूमाल डेम, पायली के पास बरगी बांध का क्षेत्र, बिजना जलाशय सहित अनेक स्थान ऐसे हैं जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य और हरियाली, इन प्रवासी पक्षियों को न केवल आकर्षित करती है वरन यहाँ इनका मुकम्मल रहवास भी मिलता है।

पक्षी प्रेमियों में उनके कलरव के साथ सुंदर दृश्यों को कैमरे में कैद करने की उत्सुकता बन गयी है। विशेषज्ञों के अनुसार सीजन बदलने के साथ प्रवासी पक्षियों का आना – जाना होता है। सायबेरिया और यूरोप के अनेक देशों से उड़ान भरकर ये 03 से 04 हजार किलो मीटर दूरी तय करने वाले गार्जेनी प्रजाति के पक्षियों के झुण्ड आना आरंभ हो गये है।

जानकारों की मानें तो नॉर्दन यूरोप और सेेंट्रल अमेरिका से गॉडवाल प्रजाति के पक्षी भी देखे जा रहे हैं। नॉर्दन यूरोप की यूरेसियन विजन, नार्थ ईस्ट अफ्रीका और सेंट्रल एशिया के वेस्टर्न मार्स हैरियर, इस्टर्न यूरोप और सेंट्रल एशिया के पैलिड हैरियर प्रजाति के पक्षी भी आ गये हैं।

आये सात समंदर पार : जानकारों की मानें तो अपेक्षाकृत ज्यादा सर्द देशों के पक्षी सर्दियों से पहले ही ब्रीडिंग कर लेते हैं और सर्दी तेज होते ही वे परिवार सहित उड़ान भरते हैं। समुद्र की लम्बी दूरी में उन्हें कहीं ठौर नहीं मिलता है, लेकिन उड़कर आ जाते हैं। 10 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में वे अपना रहवास बनाते हैं।

जानकारों के अनुसार आर्टिक यूरोप एण्ड एशिया के लिटिल स्टिंट, नॉर्दन अमेरिका और आर्टिक यूरोपीय टिमनिक स्टिंट प्रजाति के पक्षियों का आना जारी है। पक्षी प्रेमियों के अनुसार ये दोनों छोटी प्रजाति के पक्षी हैं, जो 10 से 15 हजार किलो मीटर की दूरी, उड़कर तय करते हुए जिले में आ रहे हैं।

हिमालय की तराई के पक्षियों का इंतजार : जानकारों की मानें तो बैनगंगा की धार में चहचहाने वाले ब्राउन हेडेड गुल्स एवं ब्लैक हेडेड गुल्स प्रजाति के पक्षियों का आना अभी आरंभ नहीं हुआ है। हिमालय की तराई से ये पक्षी आते हैं। बैनगंगा के साथ ही अन्य जल स्त्रोतों में भी इन्हें देखा जाता है। दलसागर और बैनगंगा नदी के साथ ही साथ पक्षी प्रेमियों की नज़र समीप से गुजरने वाली नर्मदा नदी की ओर भी है, ताकि प्रकृति की गोद में पक्षियों की खूबसूरत उड़ान देख सकें।