अतिक्रमण की जद में कान्हीवाड़ा

 

 

(शरद खरे)

केवलारी तहसील का अभिन्न अंग है कान्हीवाड़ा कस्बा। कान्हीवाड़ा शहर इन दिनों अतिक्रमण से पूरी तरह घिर चुका है। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत सहित पुलिस भी सड़कों को चौड़ा करवाने में अपने आप को असफल ही पा रही है। अतिक्रमण की जद में घिरे कान्हीवाड़ा में आये दिन दुर्घटनाएं घटित हो रहीं हैं।

कान्हीवाड़ा अब वैसा कान्हीवाड़ा नहीं बचा जो सत्तर अस्सी के दशक में हुआ करता था। आज कान्हीवाड़ा कस्बा शहर का रूप ले चुका है। यहाँ से होकर कान्हा नेशनल पार्क जाने वाले पर्यटकों की खासी तादाद है। इसके अलावा बण्डोल, कलारबांकी, कान्हीवाड़ा होकर बालाघाट जाने के लिये लोग शॉर्ट कट का इस्तेमाल भी किया करते हैं।

इन परिस्थितियों में कान्हीवाड़ा में यातायात के दबाव को समझा जा सकता है। बाहर से आने-जाने वाले भारी वाहनों की रेलमपेल कान्हीवाड़ा में मची ही रहती है। इन परिस्थितियों में कान्हीवाड़ा में आये दिन दुर्घटनाएं घटित होती रहती हैं। जरूरी नहीं है कि साईकिल या मोटर साईकिल से गिरे विद्यार्थी पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज करवायें।

सिवनी-मण्डला मार्ग पर भोमा, छुई, कान्हीवाड़ा और केवलारी में आबादी बढ़ी है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। जाहिर है इन शहरों में वाहनों की तादाद भी बढ़ी ही होगी। ऊपर से सड़कों पर यातायात का दबाव रहता ही है। सिवनी से केवलारी नैनपुर के बीच रेल सेवा भी अभी बंद है। इन परिस्थितियों में यातायात का दबाव सड़क पर ही सबसे ज्यादा होता है।

वैसे भी केंद्र सरकार सहित प्रदेश सरकार एवं माननीय न्यायालयों के द्वारा अतिक्रमण को लेकर अपनी नाराज़गी कई बार जाहिर की जा चुकी है। इन परिस्थितियों में जिला, जनपद और ग्राम पंचायतों के पास अतिक्रमण हटाने को लेकर किसी तरह का कोई बहाना शायद ही शेष बचा हो।

आश्चर्य तो इस बात पर भी होता है कि आखिर कान्हीवाड़ा में रसूखदारों के द्वारा इतना साहस कैसे किया गया है कि सरकारी जमीन पर उनके द्वारा पक्के अतिक्रमण कर लिये गये हैं! जाहिर है इसमें ग्राम पंचायतों के सरपंच, उप सरपंच एवं अन्य पंचों की मिली भगत रही होगी।

अब समय आ गया है कि मुख्य मार्गों के इर्द-गिर्द बसे शहरों, कस्बों जिनकी आबादी ज्यादा हो चुकी है वहाँ, बायपास के निर्माण की प्रस्तावना की जाये। चूँकि प्रस्तावनाओं को अमली जामा पहनाने में समय लगता है इसलिये सिवनी और केवलारी विधायकों से अपेक्षा की जा सकती है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बायपास के निर्माण के मार्ग प्रशस्त करें।

वर्तमान में केवलारी और कान्हीवाड़ा में इसकी महती जरूरत महसूस की जा रही है। संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह अढ़ायच से जनापेक्षा है कि वे ही स्वसंज्ञान से अतिक्रमण सख्ती से हटाये जाने के मार्ग प्रशस्त करते हुए कान्हीवाड़ा शहर में बायपास के निर्माण की कवायद आरंभ करवायें।