ब्हाय रोगी विभाग में मरीज़ तरस रहे चिकित्सकों को!

 

 

नहीं सुधर पा रही जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (ंसाई)। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.श्रीमति विमला वर्मा के द्वारा अस्सी के दशक में जिले को दी गयी चार सौ बिस्तर वाले इंदिरा गांधी जिला अस्पताल की अनुपम सौगात को वर्तमान के सियासतदारों के द्वारा सहेजा तक नहीं जा पा रहा है। आलम यह है कि अस्पताल में कायाकल्प अभियान जारी है और दूसरी ओर मरीज़ ओपीडी में चिकित्सकों को ही तरस रहे हैं।

ज्ञातव्य है कि जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा जिला अस्पताल की दशा और दिशा बदलने के लिये लगातार ही अस्पताल का निरीक्षण किया जाकर दिशा निर्देश दिये जा रहे हैं। जिला अस्पताल में कायाकल्प अभियान जारी है, वहीं, दूसरी ओर मरीज़ ओर उनके परिजन अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं।

जिला अस्पताल में ब्हाय रोगी प्रभाग में सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक चिकित्सकों की उपस्थिति के निर्देश राज्य शासन के द्वारा जारी किये जाने के बाद भी सिवनी के जिला अस्पताल में दोपहर एक बजे के बाद ओपीडी में महज़ एक या दो चिकित्सक ही उपस्थित रहते हैं। ओपीडी में मरीज़ों को अपनी बारी आने के लिये घण्टों इंतजार करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

जिला अस्पताल के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिला अस्पताल के ब्हाय रोगी प्रभाग में चिकित्सकों की आधा दर्जन टेबिल तो लगी हैं पर इन टेबिल्स पर बारह बजे के उपरांत महज़ एक या दो चिकित्सक ही बैठकर मरीज़ों का परीक्षण करते दिखायी देते हैं।

मरीज़ों के अनुसार जब उनके द्वारा रेजीडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) डॉ.पी. सूर्या से इस बात की शिकायत की जाती है कि ओपीडी में चिकित्सक नहीं हैं तो डॉ.सूर्या चिकित्सकों की कमी को भांपते हुए खुद अन्य कामों के साथ ही साथ मरीज़ों को देखने का कार्य करने में लग जाते हैं।

मरीज़ों के परिजनों की मानें तो सुबह के समय भी ओपीडी में महज़ एक या दो चिकित्सक ही मरीज़ों का परीक्षण करते दिखते हैं जिससे मरीज़ों की लंबी कतारें लगी दिखायी देती हैं। चिकित्सकों के बारे में पूछे जाने पर यही पता चलता है कि चिकित्सक अपने प्रभार वाले वार्ड में राउण्ड पर हैं।

सूत्रों का कहना है कि जिला अस्पताल को सीसीटीवी की जद में रखा गया है। इस लिहाज़ से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अगर खुद सुबह 09 बजे से दोपहर चार बजे तक के सीसीटीवी फुटेज देख लें कि ओपीडी में कब कितने चिकित्सक बैठकर मरीज़ों का परीक्षण कर रहे हैं तो मरीज़ों की शिकायत की सच्चाई उनके सामने आ सकती है।