घर-दुकानों में विद्युतकर्मी बांट रहे बिजली के बिल

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। बिजली बिल के कार्य में लगे मीटर वाचकों द्वारा अपने नियमितिकरण, फिक्स वेतनमान की माँग को लेकर जारी हड़ताल से बिजली बिल वितरण व रीडिंग समेत अन्य कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।

वहीं समय पर बिजली उपभोक्ताओं को बिल मिल सके और वे बिल का भुगतान कर सकें इसके लिये विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारियों द्वारा घर-घर, दुकान-दुकान बिलों का वितरण बदस्तूर जारी है।

मीटर वाचकों का अनुबंध समाप्त होने पर जिले भर के मीटर वाचक को पूर्ववत काम नहीं दिये जाने के कारण मीटर वाचक संघ द्वारा विद्युत वितरण कंपनी सिवनी के विद्युत बिल वितरण एवं मीटर रीडिंग का कार्य पिछले एक नवंबर से बंद कर दिये हैं। वहीं कंपनी का कार्य प्रभावित न हो और उपभोक्ताओं को असुविधा न हो इसके लिये सहायक यंत्री द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारी, कार्यलयीन कमर्चारी, लाइन स्टाफ से विद्युत वितरण का कार्य कराया जा रहा है। सिवनी संभाग में 12 डीसी वितरण केंद्र हैं, तथा लखनादौन डिवीजन के अन्तगर्त छपारा में छः, आदेगाँव में दो कुल आठ डीसी हैं। इसके चलते बिजली बिलों की संख्या भी काफी हैं। ऐसे में कार्य प्रभावित न हो इसके लिये विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी, कमर्चारी बिल वितरण कार्य में जुटे हैं।

सहायक अभियंता शहर वरुण सारस्वत ने बिजली उपभोक्ताओं से कहा है कि जिन विद्युत उपभोक्ताों को बिजली बिल किसी कारण से न मिला हो तो वे पुराने बिजली बिल ले जाकर भुगतान कर सकते हैं।

माँग पर अड़े मीटर वाचक : मध्य प्रदेश बिजली मीटर रीडर्स कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मीटर वाचकों के साथ छलावा किया जा रहा है। पिछले 17-18 वर्षों से कार्यरत मीटर वाचकों द्वारा वितरण कंपनी एवं शासन प्रशासन से नियमितिकरण एवं फिक्स वेतनमान के संबंध में माँग की जा रही थी। बताया गया है कि कंपनी द्वारा माँग न मानते हुए जिले में कार्यरत 170 मीटर वाचकों को बाहर करते हुए कार्यालय द्वारा अनीतिगत निर्णय लेकर मीटर वाचकों को अन्य किसी बाह्य माध्यम कंपनी के द्वारा 25 प्रतिशत मीटर वाचकों का चयन कर कार्य करने के लिये विवश किया जा रहा है। मध्य प्रदेश बिजली मीटर रीडर कर्मचारी संघ के कायर्वाहक जिलाध्यक्ष राकेश बघेल ने बताया कि 01-16 वर्षों से कार्य करने के बाद भी 75 प्रतिशत मीटर वाचकों को बाहर करते हुए उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न कर दी है जो न्याय संगत नहीं है।