क्या शोभा की सुपारी हैं निर्मित भवन!

 

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले में अब तक बेलगाम अफसरशाही, बाबुओं की लालफीताशाही और चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी किस तरह हावी रही है इसका जीता जागता उदाहरण शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज़ में वर्ष 2013 से निमार्णाधीन कन्या छात्रावास से लगाया जा सकता है, जो बनने के छः साल बाद भी छात्राओं के उपयोग में नहीं आ पा रहा है। वैसे जिला चिकित्सालय में बनने के काफी विलंब के बाद आरंभ हुआ नव निर्मित ब्हाय रोगी विभाग भवन, प्रसूति वार्ड के भवन और अब तक आरंभ नहीं हो पाये ट्रामा केयर यूनिट भी इसकी बानगी माने जा सकते हैं।

प्रियदर्शनी के नाम से सुशोभित इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय के ब्हाय रोगी विभाग, प्रसूति वार्ड और ट्रामा केयर यूनिट के भवन बनकर तैयार हुए, उनका लोकार्पण भी हुआ पर दो साल से अधिक समय बाद इन भवनों में काम आरंभ हो पाया। इनमें से ट्रामा केयर यूनिट का भवन आज भी शोभा की सुपारी ही बना हुआ है। यक्ष प्रश्न यही है कि अगर इन भवनों को इतने समय तक व्यर्थ ही खाली रखना था तो फिर इनके निर्माण में जनता के गाढ़े पसीने से संचित राजस्व को क्यों बहाया गया?

इसी तरह शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज़ के खेल मैदान से लगे महिला छात्रावास भवन को अब तक आरंभ नहीं करवाया जा सका है। लगभग अस्सी लाख की लागत का यह भवन लगभग छः सालों से बनकर तैयार है और इसका कोई उपयोग नहीं कर रहा है इसलिये यह भवन अब जर्जर अवस्था को प्राप्त होता जा रहा है।

आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि अधिकतर सियासी कार्यक्रम पॉलीटेक्निक मैदान पर आयोजित होते हैं। इस मैदान पर सरकारी और गैर सरकारी आयोजनों में सांसद, विधायक और आला अफसरान अतिथि बनकर जाते हैं पर किसी की नज़रें भी इस भवन की ओर नहीं जाना आश्चर्यजनक ही माना जायेगा।

इस भवन के बनने के बाद इसका आधिपत्य मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंचरना मण्डल (हाउसिंग बोर्ड) के द्वारा पॉलीटेक्निक प्रशासन को क्यों नहीं दिया गया, यह भी शोध का ही विषय माना जायेगा। बताते हैं कि इस भवन में अभी बिजली की फिटिंग बाकी है। अगर ऐसा है तो पॉलीटेक्निक प्रशासन और हाउसिंग बोर्ड दोनों ही इसके लिये पूरी तरह दोषी माने जा सकते हैं।

इन छः सालों में अब तक न जाने कितनी छात्राएं पॉलीटेक्निक से तीन साल का पाठ्यक्रम पूरा कर उपाधि (डिग्री) हासिल करके जा चुकीं होंगी। इन छात्राओं को शहर में अन्य वैध, अवैध कन्या छात्रावास या पेईंग गेस्ट (पीजी) में रहना पड़ा होगा। उन्हें निश्चित तौर पर पीजी या अन्य छात्रावास खोजने एवं वहाँ से कॉलेज़ आने – जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा होगा। इसके लिये जवाबदेह आखिर कौन है?

पॉलीटेक्निक कॉलेज़ प्रदेश के तकनीकि शिक्षा विभाग के अधीन आता है। यह जिला मुख्यालय का मामला है। इस लिहाज़ से इस बारे में विधानसभा में पिछले बार के जिले के चारों विधायक दिनेश राय, कमल मर्सकोले, रजनीश हरवंश सिंह एवं योगेंद्र सिंह को अपनी बात रखकर इसे आरंभ करवाया जाना चाहिये था। अब चुनाव के उपरांत दिनेश राय, राकेश पाल सिंह, अर्जुन सिंह काकोड़िया और योगेंद्र सिंह की यह जवाबदेही है कि वे इस संबंध में विधान सभा में अपनी बात रखें।

संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि वे ही स्वसंज्ञान से अब इस छात्रावास को पूरा करने के लिये समय-सीमा तय करें और इस छात्रावास को आरंभ करवायें ताकि ग्रामीण अंचलों से आने वालीं छात्राओं को पॉलीटेक्निक में विद्या अध्ययन करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

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