साईकिल भंडारण के नाम पर सरकार को लगाई 03 करोड़ की चपत

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। स्कूली छात्रों को साइकिल बांटने की योजना में अधिकारियों ने सरकार को तीन करोड़ की चपत लगा दी। साइकिलों को सुरक्षित रखने के नाम पर ये अतिरिक्त राशि सरकार से ली गई थी।

लोक शिक्षण संचालनालय ने छात्रों को निःशुल्क साइकिल वितरण करने के लिए लघु उद्योग निगम से 2017 – 2018 में 04 लाख 29 हजार 357 साइकिल खरीदी थीं, जिनकी कीमत तीन सौ करोड़ रपए थी। इसमें विकास खंड स्तर पर साइकिलों के भंडारण के लिए लघु उद्योग निगम को प्रति साइकिल 30 रुपए अतिरिक्त भुगतान भी किया गया।

लेकिन संचालानालय के अधिकारियों ने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी भवनों और स्कूलों में ही साइकिलों को रखवा दिया। इससे सरकार को सीधे-सीधे सवा चार लाख साइकिल भंडारण के लिए दी गई अतिरिक्त 03 करोड़ रुपए की चपत लग गई। महालेखाकार की जांच टीम की आपत्ति पर आयुक्त, लोक शिक्षण ने जांच के बिन्दुओं पर सहमति दी, लेकिन आपत्ति का जवाब महालेखाकार को नहीं दिया गया।

ऑडिट जांच में सामने आई जानकारी : ऑडिट जांच में पता चला कि 4 जिला शिक्षा अधिकारियों के पास 3696 और 21 विकास खंड अधिकारियों के पास 5639 साइकिलें शेष बची हुई थीं। यानी आवश्यकता से अधिक साइकिलें खरीदी गईं। आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय ने छात्रों को साइकिल वितरित करने के नाम पर 2018 में 166.58 करोड़ रुपए लघु उद्योग निगम के खाते में जमा करवा दिए।

ऑडिट टीम ने अपनी जांच में साफ लिखा है कि मध्यप्रदेश वित्त संहिता के अनुसार बिना आवश्यकता के सरकारी खजाने से पैसा नहीं निकाला जा सकता। संचालनालय ने शिक्षण संस्थाओं को पूर्व में दिए गए करोड़ों रुपए के अनुदान के उपयोगिता प्रमाण पत्र लिए बिना ही अप्रैल 2017 से जून 2018 तक पोषण, अधोसंरचना विकास, लायब्रेरी समेत अन्य कामों के लिए 14 करोड़ 33 लाख रुपए दे दिए।

लैपटॉप और किताबें देने में गड़बड़ी : प्रदेश में मेधावी छात्र योजना में लैप-टॉप बांटने के लिए 110 करोड़ रुपए खर्च करना बताए गए हैं। छात्रों के खाते में लैप-टॉप के लिए जमा किए गए 25 हजार रुपए के बैंक स्टेटमेंट नहीं मिलने से ऑडिट में इसकी पुुष्टी नहीं हो पाई कि ये राशि चिन्हित छात्र के खाते में जमा हुई है कि नहीं।

ऑडिट जांच में पता चला कि लोक शिक्षण संचालनालय ने कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क दी जाने वाली पुस्तकों के वितरण में ही पाठ्य पुस्तक निगम को 82 करोड़ 47 लाख रुपए का भुगतान कर दिया।

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