बारिश के दौरान कितने वृक्षों को मिला जीवन

 

उन लोगों से मुझे शिकायत है जिनके द्वारा सिवनी शहर ही नहीं बल्कि संपूर्ण जिले में हरे-भरे वृक्षों को बेहिसाब जमींदोज करवाया जा रहा है। इस कार्य में गाँवों की स्थानीय पंचायतें भी शामिल हैं। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन की स्पष्ट अनदेखी के चलते ऐसा लगता है जैसे सिवनी में हरे-भरे वृक्षों की कोई कीमत नहीं है और पर्यावरण संतुलन बनाये रखना यहाँ पूरी तरह बेमानी ही है।

सिवनी में लगभग समस्त विकासखण्डों में इस वर्ष रिकॉर्ड बारिश हुई है और वैसे भी प्रकृति ने सिवनी जिले को अकूत वन संपदा से नवाजा है लेकिन संबंधित विभागों की अनदेखी के कारण सिवनी जिले के अनेक वन क्षेत्र मैदानी इलाकों में तब्दील हो चुके हैं और जो शेष बचे हुए हैं वहाँ भी वनों की कटाई बेहिसाब तरीके से की जा रही है। सिवनी की ही यदि बात की जाये तो यहाँ मॉडल रोड के नाम पर नगर पालिका के द्वारा सड़कों के किनारे लगे हरे-भरे वृक्षों को यह बताकर कटवा दिया गया कि उनके स्थान पर नये पौधों का रोपण किया जायेगा।

नियमानुसार भी नये पौधों का रोपण किया जाना था लेकिन न तो अब तक मॉडल रोड बन सकी और न ही काटे गये वृक्षों के स्थान पर नये पौधों का रोपण करके उन्हें सहेजने की कोशिश ही की गयी। अच्छी खासी बारिश होने का फायदा सिवनी को नहीं मिल सका जिसके कारण नये पौधे जीवन ही नहीं पा सके। नगर पालिका यदि चाहती तो इस वर्ष हुई बारिश का भरपूर फायदा उठाकर सिवनी को हरे-भरे वृक्षों की सौगात देकर, इस शहर को सुंदर बनाने की दिशा में पहल कर सकती थी लेकिन ऐसा कहीं भी देखने को नहीं मिल सका।

दरअसल सिवनी में अतिक्रमणों को हटाया ही नहीं जा रहा है जिसके कारण नगर पालिका यदि चाहे तो भी उसके पास वृक्षारोपण के लिये पर्याप्त जगह ही नहीं है। फुटपाथ गायब होकर सड़कों पर तक दुकानें, इस शहर में सजी हुई मिल जायेंगी। कमोबेश यही स्थिति जिला मुख्यालय से सटे ग्रामीण अंचलों का भी है जहाँ सरकारी जमीन पर लगे हरे-भरे वृक्षों को यह कहकर कटवाया जा रहा है कि उनके स्थान पर नये पौधे लगाये जायेंगे।

इस स्तंभ के माध्यम से जिला प्रशासन से अपील है कि उसके द्वारा शीघ्र अतिशीघ्र ऐसे कदम उठाये जायें जिसके द्वारा हरे-भरे वृक्षों को जमींदोज करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाये। ग्रामीण क्षेत्रों के उन स्थानों पर भी जहाँ सरपंच-सचिव के द्वारा इस तरह के कार्यों को शह दी जा रही है वहाँ एक सक्षम अधिकारी के माध्यम से जाँच करवायी जाये ताकि सरपंच-सचिव के द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा जमाने के लिये रसूखदार लोगों को जो शह दी जा रही है उस पर लगाम लगायी जा सके।

शिरीष तिवारी