जंगल हो रहे जुए की फड़ों से आबाद!

 

 

जुआरियों की सुविधाओं का भी रखा जा रहा है पूरा ख्याल!

(अपराध ब्यूरो)

सिवनी (साई)। जिले भर में ग्रामीण अंचलों में जुए की फड़ों से जंगल गुलज़ार हो रहे हैं। रोजगार के साधनों के अभाव में जंगलों में लगने वाली जुए की फड़ों में जुआरियों को लाने ले जाने के लिये बेरोजगार युवाओं की फौज भी तैनात है। वहीं, पुलिस के द्वारा यदा कदा छोटे मोटे जुआरियों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा ली जाती है।

बताया जाता है कि जंगलों में बकायदा पण्डाल लगाकर जुआ खिलवाया जा रहा है। जुए के अड्डों पर जुआरियों की सुविधा का सशुल्क पूरा – पूरा ध्यान भी रखा जाता है। इन फड़ों में जुआरियों को लाने, ले जाने के लिये भी चार पहिया वाहनों का इस्तेमाल किये जाने की खबरें हैं।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि कान्हीवाड़ा थाना क्षेत्र के जंगल, कई सालों से जुए की फड़ों के लिये बदनाम रहे हैं। सूत्रों की मानें तो जुए की फड़ों से संबंधित थानों के पहुँच मार्गों तक जगह – जगह युवाओं को तैनात किया जाता है जिन्हें जुआरियों की भाषा में टॉवर कहा जाता है। ये टॉवर पुलिस या अन्य गतिविधियों की पल-पल की खबर जुए की फड़ संचालकों तक पहुँचाते रहते हैं। इन टॉवर्स को पाँच सौ से लेकर एक हजार रूपये प्रतिदिन का पारिश्रमिक भी दिया जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो जंगलों में चल रहीं इन जुए की फड़ों में फड़ संचालकों के द्वारा जुआरियों के लिये गरमा गरम चाय काफी के साथ ही साथ नाश्ता, शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के साथ ही साथ उनकी मनपसंद ब्रांड की शराब भी मुहैया करवायी जा रही है। इस सबके लिये जुआरियों को अतिरिक्त शुल्क देना होता है।

सूत्रों से जब यह पूछा गया कि जिले में जहाँ – जहाँ जंगलों के अंदर जुआ संचालित हो रहा है वहाँ – वहाँ आसपास के ग्रामों के निवासी इसका विरोध क्यों नहीं करते? इसके जवाब में सूत्रों का कहना था कि कोई भी ग्रामीण इन जुए की फड़ संचालकों से सीधे – सीधे पंगा लेने की स्थिति में नहीं है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि जैसे ही किसी भी थाने का प्रभारी बदलता है वैसे ही कुछ दिनों के लिये जुए की फड़ बंद हो जाती है। उसके बाद जैसे ही थानों में पदस्थ फड़ संचालकों के सधे हुए कर्मचारी, थाना प्रभारियों को साध लेते हैं वैसे ही इन थाना क्षेत्र में जुए की फड़ें फिर से आबाद हो जाती हैं।

सूत्रों ने बताया कि जंगलों के अंदर इमरजेंसी लाईट, पण्डाल के साथ ही आराम के पूरे इंतजामों के साथ जुए की फड़ें कान्हीवाड़ा एवं घंसौर, धनौरा, लखनवाड़ा, आदेगाँव क्षेत्रों के जंगलों में सबसे ज्यादा आबाद रहती हैं। इन जुए की फड़ों में आसपास के जिलों सहित अन्य प्रदेशों के जुआरियों के द्वारा भी शिकरत की जाती है।

सूत्रों ने बताया कि जुआ फड़ों में दस से पच्चीस प्रतिशत प्रतिमाह की दर पर स्पॉट फाईनेंस की सुविधा भी दी जाती है। सूत्रों ने बताया कि जब भी इस मामले में ज्यादा शोर शराबा होता है या अधिकारियों का दबाव आता है, उसके बाद जुआ फड़ संचालकों के द्वारा छोटे मोटे जुआरियों को पकड़वाकर मामले को शांत करने का प्रयास भी किया जाता है।