किसने कर दिया कंप्यूटर ऑपरेटर का वेतन निर्धारण!

 

 

गोपालगंज में पदस्थ कर्मचारी दे रहे सिवनी में सेवाएं, सम्हाल रहे महत्वपूर्ण विभाग!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर चाहे जो भी अधिकारी पदस्थ हों, पर कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर पदस्थ एक कर्मचारी के द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाकर सीएमएचओ कार्यालय में अनेक महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार सम्हाला जा रहा है।

सीएमएचओ कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालगंज में संगणक (कंप्यूटर ऑपरेटर) के पद पर पदस्थ सुरेंद्र कुमार खरे को नियम विरूद्ध तरीके से सीएमएचओ कार्यालय में सालों से संलग्न करके रखा गया है।

सूत्रों ने बताया कि उक्त कर्मचारी को सीएमएचओ के द्वारा सालों से कंप्यूटर ऑपरेटर का पद छोड़कर सूचना का अधिकार, नर्सिंग होम पंजीयन, चिकित्सक पंजीयन, पैथालॉजी पंजीयन, स्टेशनरी आदि जैसी अनेक महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभारी बनाया गया है, जिससे कार्यालय में लंबे समय से रोष और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

सूत्रों ने आगे बताया कि उक्त कर्मचारी का समयमान वेतनमान किस अधिकारी के द्वारा तय किया गया है, यह बात भी शोध का ही विषय माना जा सकता है। मूलतः तिलहन संघ में सेवाएं देने वाले उक्त कर्मचारी को तिहलन संघ में तालाबंदी के उपरांत स्वास्थ्य विभाग में संविलियन कर दिया गया था।

सूत्रों ने बताया कि छटवें एवं सातवें वेतन आयोग के तहत इनके वेतन निर्धारण में अनेक विसंगतियां हैं। उक्त कर्मचारी सीएमएचओ कार्यालय में वर्ष 2015 से पदस्थ हैं और 2015 से ही इनके वेतन पत्रक की अगर जाँच करवा ली जाये तो दूध का दूध पानी का पानी हो सकता है वरन, उक्त कर्मचारी के द्वारा लिये गये अधिक वेतन के चलते इन पर वसूली (रिकवरी) भी निकाली जा सकती है।

सूत्रों की मानें तो उक्त कर्मचारी के द्वारा अपने वेतन का निर्धारण खुद ही किया जाकर वेतन का आहरण कराया जाता रहा है। सेवा निवृत्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रहे डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव से लेकर वर्तमान सीएमएचओ तक के कार्यकाल में अगर उक्त कर्मचारी को हुए वेतन के भुगतान की जाँच अगर करवा ली जाये तो अधिकारी भी दातों तले उंगली दबा सकते हैं।

सूत्रों ने यह भी कहा कि उक्त कर्मचारी के पास जिन मलाईदार विभागों का प्रभार है उनमें भी रिश्वत के लेनदेन की शिकायतें जमकर मिल रही हैं। पिछले दिनों प्रदूषण नियंत्रण मण्डल से चिकित्सकों और अस्पतालों को लिये जाने वाले अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिये भी उक्त कर्मचारी पर भारी रिश्वत लेने के आरोप लगे थे।

सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिये हैं कि सीएमएचओ कार्यालय के द्वारा समय – समय पर चिकित्सकों से उनकी उपाधियां (डिग्री आदि) जमा करवाये जाने के आदेश भी उक्त कर्मचारी के इशारों पर ही जारी किये जाते हैं पर इन आदेशों की तामीली की ओर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता है, इसकी जाँच भी आवश्यक है।