पाकिस्तान में करतापुर साहिब का तीर्थ कराएंगे कमल नाथ

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। अब मध्यप्रदेश में रहने वाले सिख समाज के लोग पाकिस्तान में करतारपुर साहिब का दर्शन करने निःशुल्क जा सकेंगे।

कमल नाथ सरकार उनके आने जाने, खानेकृपीने और ठहरने का इंतजाम कराएगी। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने बुधवार को आदेश जारी कर करतारपुर साहिब गुरव्दारे को मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में शामिल किया है। ऐसे में सिख समुदाय के लोग देश के महत्वपूर्ण गुरुव्दारा और तीर्थ स्थलों के साथ पाकिस्तान में स्थित करतारपुर साहिब के दर्शन कर सकेंगे।

इसके पहले मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इंदौर में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा और जबलपुर में सिक्ख संग्रहालय बनाने के लिए 20 करोड रुपए देने की घोषणा कर चुके हैं।

सिख समाज की मांग मंज़ूर : सिखों के धर्मगुरु गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर मध्य प्रदेश के सिख समाज को सरकार की ओर से बड़ा तोहफा मिला है।

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने समाज की मांग मंज़ूर करते हुए करतारपुर साहिब को मुख्यमंत्री की तीर्थदर्शन योजना में शामिल कर लिया है। इस योजना के तहत सिख समाज के 60 या उससे अधिक उम्र के बुज़ुर्ग तीर्थयात्री को मध्य प्रदेश सरकार अपने खर्च पर करतारपुर साहिब की तीर्थयात्रा कराएगी।

9 नवंबर को खुला कॉरिडोर : करतारपुर साहिब पाकिस्तान में स्थित है। भारत और पाकिस्तान सरकार ने गुरुनानक देव के 550वें प्रकाश पर्व पर इस गुरुद्वारे के लिए कॉरिडोर खोला है। गुरुनानक देव ने अपने जीवन के आख़िरी समय के कुछ दिन इस गुरुद्वारे में बिताए थे।

यह कॉरिडोर खोलने के बाद भारत की ओर से पहले जत्थे में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी सहित 575 लोग शामिल हुए।

एक साल में करतारपुर कॉरिडोर का काम पूरा : गुरुनानाक देव के 550 वें जन्मोत्सव पर होने वाले प्रकाश पर्व के ठीक पहले 9 नवम्बर को करतारपुर कॉरिडोर खोला गया। ये ऐसा मौका था जिसका देश के लाखों सिख श्रद्धालु वर्षों से इंतजार कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इसे मूर्त रूप दिया।

करतारपुर कॉरिडोर की बात 1999 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच शुरू हो गई थी। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। उसके बाद देश में कई सरकारें आईं और चली गईं लेकिन किसी भी सरकार ने इस मुद्दे पर उस गंभीरता से नहीं लिया। जितना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने लिया और इसका ही असर था कि एक साल में करतारपुर कॉरिडोर का काम पूरा कर लिया गया।

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