जीवन व्यथा नहीं कथा है : सुखपाल महाराज

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जीवन व्यथा नहीं कथा है जो जिसको व्यथा समझता है उसे दुःखों का सामना करना पडता है। जो इसे कथा समझता है बस वही जीव ईश्वर के परम धाम को प्राप्त करता है। इसलिये अपने जीवन को कथा समझना चाहिये।

उक्ताशय के उद्गार वृन्दावन से आये देवकी नंदन ठाकुर महाराज के शिष्य सुखपाल महाराज ने नगर के कंटगी रोड स्थित आधुनिक कॉलोनी में कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र, प्रहलाद चरित्र गज और ग्राहय और वामन अवतार की कथा सुनाते हुए व्यक्त किये।

कथा वाचक महाराजश्री ने आगे बताया कि जैसे भूख के लिये भोजन होना चाहिये, ठीक उसी तरह हमें अपने जीवन को तृप्त करने के लिये कथा की आवश्यकता होती है। महाराजश्री ने श्रद्धावान लोगों से अधिक से अधिक मात्रा में कथा स्थल पर पहुॅँचकर, कथा श्रवण कर पुण्यलाभ अर्जित करने की अपील की है।