जैव विविधता संकट उत्पन्न हो रहा दलसागर में!

 

 

सामाजिक कार्यकर्त्ता लक्ष्मी कश्यप ने किया प्रशासन का ध्यान आकर्षित

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। ऐतिहासिक दलसागर तालाब के जलीय जीव जंतु एवं वनस्पति, मछलियों आदि पर दल सागर में प्रदूषित पानी के जाने से प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उक्ताशय की बात सामाजिक कार्यकर्त्ता लक्ष्मी कश्यप के द्वारा जारी विज्ञप्ति में कही गयी है।

लक्ष्मी कश्यप ने प्रशासन से अपील की है कि दल सागार तालाब को भी स्वच्छता सर्वेक्षण में शामिल किया जाये। उन्होंने कहा कि ऐतिहासक धरोहर एवं सिवनी शहर के सौंदर्य में चार चाँद लगाने वाले दल सागर तालाब के अंदर गंदे नालों का पानी प्रवाहित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि नगर पालिका परिषद के रैन बसेरा के बाजू वाले नाले से पानी दल सागर तालाब के अंदर जा रहा है। कुछ साल पहले इस नाले से पानी को दल सागर की ओर जाना बंद करवा दिया गया था। अचानक ही बारिश के दिनों में इसे फिर आरंभ कर दिया जाता है।

लक्ष्मी कश्यप का कहना है कि दल सागर तालाब के मुहाने पर धुल रहे वाहनों का कीट और ऑईल, तालाब की तलहटी में समाते जा रहा है। इसके अलावा यहाँ कपड़े आदि भी धुल रहे हैं। इन सभी कारणों से दल सागर तालाब की तलहटी में गंदगी जमा होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि दल सागर तालाब के इस तरह प्रदूषित होने के कारण दल सागर तालाब में जैव विविधता का संकट आन खड़ा हुआ है। इस तालाब में मछलियों की तादाद दिन ब दिन कम होती जा रही है। इसके अलावा केंकड़े, केंचुए, कछुए सहित अन्य जलीय जीवों की तादाद भी कम हो रही है।

उन्होंने कहा कि दलसागर तालाब के संधारण, साफ सफाई आदि में जन प्रतिनिधियों के द्वारा लगातार ही उदासीनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है, जो चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि दल सागर तालाब के संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन को कदम उठाये जाने चाहिये।

उन्होंने कहा कि दल सागर तालाब में शराब की बोतलें, प्लास्टिक की पन्नियां, कप, गिलास आदि भारी मात्रा में फेंके जा रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि दल सागर तालाब को स्वच्छता सर्वेक्षण का एक घटक बनाया जाकर इसकी सुध ली जाये।