यहां किया जा रहा मिट्टी का मेकअप

 

यह है इसके पीछे की पूरी कहानी

 

(ब्यूरो कार्यालय)

जबलपुर (साई)। ठंड आते ही गार्डन में गेंदे, सेवंती और तरह-तरह के गुलाब की खुशबू बिखरने लगती है। लेकिन इस बार इन फूलों की बहार के लिए थोड़ा इंतजार और करना पड़ेगा। इसका कारण है इस बार हुई ज्यादा बारिश।

ज्यादा बारिश ने सितंबर में गार्डन्स के लिए होने वाली तैयारी के लिए समय नहीं दिया। परिणामस्वरूप गार्डन की तैयारी बारिश रुकने के बाद शुरू हुई। विशेषज्ञ बताते हैं कि अभी भी गमलों के पौधे तो तैयार हो गए हैं लेकिन जमीन में लगने वाले फूलों के पौधों के लिए मिट्टी का मेकअप करके उसे तैयार करना पड़ रहा है। तब जाकर दिसंबर-जनवरी तक गार्डन फूलों से गुलजार हो सकेंगे।

पौधों से ज्यादा खाद की डिमांड:बारिश के कारण मिट्टी गीली होने से ठंड में लगाए जाने वाले फूलों के पौधों के बीज और पौध सड़ जा रही है। यही वजह है कि इस समय पौधे लगाने के लिए मिट्टी की तैयारी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। मिट्टी की उर्वरकता को बढ़ाने के लिए गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, कोकोनट कंपोस्ट डालकर मिट्टी तैयार हो रही है। गार्डन के शौकीन नर्सरी में जाकर पौधों के साथ-साथ खाद की डिमांड ज्यादा कर रहे हैं।

मिट्टी की तैयारी जरूरी: विशेषज्ञ राज काबरा ने बताया कि इस बार बारिश ने फूलों की आवक को थोड़ा लेट किया है। जो काम सितंबर में हो जाता था इस बार अब जाकर गार्डन तैयार हुए हैं। क्योंकि ठंड में जो पौधे लगते हैं उन्हें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। अब क्योंकि मिट्टी गीली थी और पानी के कारण मिट्टी की उर्वरक क्षमता में भी कमी आती है इसलिए पहले गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट वगैरह से मिट्टी को इस लायक बनाया जा रहा है कि ठंड में लगने वाले फूलों के पौधे लगाए जा सकें।

पौधों की मांग में कमी: सदर में नर्सरी संचालक भारती ने बताया कि अभी तक तो सीजनल फूलों के पौधों की डिमांड बहुत कम है। जबकि सबसे ज्यादा गेंदे, लाल गेंदी, सेवंती के पौधो खरीदे जाते थे, जो कि इस वर्ष कम हैं। इसी तरह गुलाब के पौधे तैयार तो हैं मांग बहुत कम है।

इनडोर-आउटडोर के लिए सही मौसम: ठंड इनडोर व आउटडोर दोनों ही तरह के पौधों के लिए सबसे उपयुक्त मौसम है। गमलों में पौधे लगाने के साथ ही टेरिस गार्डन भी ठंड के मौसम में अच्छे से तैयार हो जाते हैं क्योंकि ठंड का मौसम अनुकूल होता है। ठंड में ज्यादा तेज धूप भी नहीं होती। इससे पौधे अच्छे से बढ़ते हैं और जड़ें भी मजबूत होती हैं।