कराहता जिला अस्पताल

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी से पूरी तरह उतर चुकी हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। सालों से सिवनी के नागरिक स्वास्थ्य सुविधाओं को तरस रहे हैं। सांसद विधायकों के द्वारा भी इस अव्यवस्था को संसद या विधानसभा के उचित मंच पर वजनदारी से न उठाये जाने का नतीज़ा है कि सिवनी जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह चरमरा गयी हैं।

लगभग डेढ़ दशक से अधिक समय से सिवनी जिला मंत्री विहीन है। जिले में इसकी क्षति पूर्ति के रूप में लाल बत्ती अवश्य ही दी गयी किन्तु लाल बत्ती धारकों ने भी अपने स्तर पर इस बात के लिये प्रयास नहीं किये हैं कि सिवनी जिला स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में समृद्ध हो जाये। आज जिले में प्रदेश स्तर की एक भी लाल बत्ती नहीं है। जिले में स्वास्थ्य विभाग की बेढंगी चाल से सभी बुरी तरह आजिज़ दिख रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग में एक बात अवश्य ही देखने को मिल रही है, वह है नया निर्माण। जिला चिकित्सालय परिसर में नये भवनों का निर्माण अवश्य ही किया जा रहा है। यक्ष प्रश्न तो यही खड़ा हुआ है कि नये भवन तो बन जायेंगे पर अगर चिकित्सक और पैरा मेडिकल स्टाफ ही नहीं रहेगा तो इन भवनों का क्या उपयोग? वर्तमान में नये भवन भी आवंटन के अभाव के चलते मंथर गति से ही निर्मित हो रहे हैं।

जाहिर है कि सबसे पहले इन भवनों में लगने वाले विभागों के लिये कर्मचारियों की तैनाती की स्वीकृति संचालनालय स्तर पर करायी जाये। जब तक स्वास्थ्य विभाग की स्थापना शाखा (एस्टबलिशमेंट सेक्शन) में ये पद स्वीकृत नहीं होंगे तब तक यहाँ नये चिकित्सक या पैरामेडीकल स्टाफ की तैनाती कैसे होगी एवं उनका वेतन कहाँ से निकलेगा?

वैसे यह बात सांसद विधायक भली भांति जानते होंगे पर इस दिशा में अब तक इन्होंने पहल क्यों नहीं की है, यह शोध का ही विषय है। नये भवन बनाने से ठेकेदार को काम मिलता है और इस तरह के निर्माण कार्यों में कमीशनबाजी किसी से छुपी नहीं है। कई साल बीतने के बाद भी अस्पताल परिसर का ट्रामा केयर यूनिट अब तक आरंभ नहीं हो पाया है।

जिला चिकित्सालय में हर माह लाखों रुपये का भुगतान सफाई और सुरक्षा की मद में हो रहा है। यहाँ की सफाई और सुरक्षा का जायजा प्रशासन और जनप्रतिनिधि औचक निरीक्षण में लें तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी है। पेरामेडीकल स्टाफ में नर्सेस़ की भरमार है। एक-एक वार्ड में तीन-चार नर्स एक समय में कर्त्तव्य पर उपस्थित रहतीं हैं। ग्रामीण अंचलों में इनकी कमी बतायी जाती है।

जिला चिकित्सालय के नेत्र विभाग में एक भी स्थायी चिकित्सक नहीं है। इस बारे में विधानसभा में किसी भी विधायक ने प्रश्न उठाने की जहमत नहीं उठायी है। रोज़ाना बड़ी तादाद में मरीज़ चिकित्सालय आते हैं और चिकित्सकों की कमी से जूझते जिला चिकित्सालय से निराश ही वापस जाते हैं।