नियम विरूद्ध चल रहे स्टोन क्रॅशर

 

(ब्यूरो कार्यालय)

बण्डोल (साई)। बण्डोल थाना क्षेत्र में दर्जनों की तादाद में चल रहे स्टोन क्रॅशर्स के खिलाफ कार्यवाही करने में खनिज विभाग के आला अधिकारियों को पसीना आता दिख रहा है।

विभागीय सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि वन एवं पर्यावरण विभाग के द्वारा इन क्रॅशर्स की संस्थापना के लिये दी जाने वाली सशर्त अनुमति में इस बात का उल्लेख साफ तौर पर किया जाता है कि महुआ, आम, जामुन, इमली आदि फलदार पेड़ों के आसपास न तो उत्खनन किया जाये न ही क्रॅशर लगाया जाये। इस तरह के वृक्षों से लगभग 100 मीटर की दूरी पर ही क्रॅशर्स की संस्थापना की जाये।

फैल रहा प्रदूषण : बण्डोल क्षेत्र में संचालित होने वाले क्रॅशर्स से उड़ने वाली धूल के कारण क्षेत्र में जबर्दस्त प्रदूषण फैल रहा है। इनमें से अधिकांश क्रॅशर संचालकों के द्वारा अपने – अपने क्षेत्र में वृक्षारोपण का काम नहीं करवाया गया है। यही नहीं उनके दायरे में आने वाले अनेक वृक्षों को भी इनके द्वारा नेस्तनाबूत कर दिया गया है।

आ रहीं दरारें : ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामीण आबादी के आसपास ही पत्थर निकालने के लिये संचालकों के द्वारा ब्लास्टिंग की जाती है। इस ब्लास्टिंग से लोगों के घर थर्रा उठते हैं और मकानों में दरारें भी आ रही हैं।

नहीं कराया सीमांकन : लगभग एक डेढ़ दशक पूर्व क्रॅशर्स की संस्थापना के वक्त ली गयी पाँच – पाँच एकड़ भूमि की लीज़ से कितना पत्थर निकला होगा, इसका कितना राजस्व संचालकों के द्वारा जमा करवाया गया है इस बारे में न तो राजस्व विभाग को देखने की फुर्सत है और न ही खनिज विभाग ही इस मामले में संज़ीदा दिख रहा है।

दुर्घटनाओं की आशंकाएं : क्षेत्र में इन क्रॅशर्स के संचालकों के द्वारा जहाँ – जहाँ से पत्थर निकाला गया है वहाँ बड़े और गहरे गड्ढे बन चुके हैं। बरसात में इन गड्ढों में पानी भर जाता है जो तालाब का रूप ले लेते हैं। असुरक्षित पड़ीं इन खदानों में अनेक दुर्घटनाएं भी घट चुकीं हैं।