85 से 90 के बीच अंक मिल सकते हैं अस्पताल को!

 

पीयर असिस्मेंट में पूरी तरह संतुष्ट होकर गया जाँच दल!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। शुक्रवार को छिंदवाड़ा से आये जाँच दल के द्वारा इंदिरा गांधी जिला अस्पताल में चल रहे कायाकल्प अभियान का पीयर असिस्मेंट किया गया। जाँच दल इस निरीक्षण से पूरी तरह संतुष्ट नज़र आया किन्तु अस्पताल परिसर में घूम रहे आवारा मवेशी जाँच दल को नागवार गुज़रे।

जाँच दल के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार जिस तरह का नज़ारा शुक्रवार को नज़र आया वैसा ही नज़ारा अगर साल के 365 दिन रहता हो तो सिवनी का जिला अस्पताल कायाकल्प अभियान में प्रदेश में प्रथम स्थान पर आ सकता है, पर दबी जुबान से दल के सदस्य यह भी कहते पाये गये कि हर साल छिंदवाड़ा के अस्पताल का भी पीयर असिस्मेंट होता है और जाँच दल के आने के पहले किस तरह व्यवस्थाएं चाक चौबंद की जाती हैं यह बात किसी से छुपी नहीं हैं।

यह जाँच दल छिंदवाड़ा अस्पताल के रेजीडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) डॉ.एस.के. दुबे के नेत्तृत्व में सिवनी आया था। डॉ.दुबे ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि सिवनी में अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह चाक चौबंद पायी गयीं। मरीज़ों और उनके परिजनों के लिये भी व्यवस्थाएं अप टू द मार्क ही मिलीं।

इधर, जाँच दल के द्वारा जब अस्पताल का निरीक्षण किया जा रहा था उस दौरान अस्पताल परिसर में घूम रहे आवारा मवेशी इस जाँच दल को नागवार गुज़रे। जाँच दल के सदस्यों के द्वारा इन मवेशियों के फोटो अपने – अपने मोबाईल में भी कैद कर लिये गये।

बताया जाता है कि जब इस बात की जानकारी जिला चिकित्सालय के प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) को लगी, उनके द्वारा तत्काल अस्पताल प्रशासन से अपनी नाराज़गी जाहिर करते हुए इस मामले में स्पष्टीकरण चाहा गया। इस बात पर अस्पताल प्रशासन पूरी तरह ही मौन नज़र आया।

डॉ.दुबे के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी में जिस तरह की व्यवस्थाएं जाँच दल के द्वारा देखी गयी हैं उनके अनुसार सिवनी के अस्पताल को पीयर असिस्मेंट में 85 से 90 फीसदी अंक दिये जा सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि अस्पताल परिसर में घूम रहे आवारा मवेशियों के कारण माईनस मार्किंग भी की जा सकती है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रदेश भर के जिला चिकित्सालयों में इस बात की होड़ लगी है कि कौन सा अस्पताल टाप फाईव में अपना स्थान बनाता है। इसके लिये सभी जिलों में अपने – अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। जिला अस्पतालों को जाँच दल के सामने बेहतर से बेहतर साबित करने का ताना बाना हर जगह बुना जा रहा है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि जिस भी जिले को 70 फीसदी से ज्यादा अंक मिलेंगे उन अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग के किसी क्षेत्रीय संचालक के नेत्तृत्व में एक दल को भेजकर इसका पुनः निरीक्षण कराया जाकर यह देखा जायेगा कि पूर्व में किये गये जाँच दल के निरीक्षण में कितनी सत्यता है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि जिन अस्पतालों को सत्तर फीसदी से ज्यादा नंबर दिये जायेंगे उन अस्पतालों में गोपनीय तरीके से एक जाँच दल भेजे जाने की अनुशंसा भी जाँच दलों के द्वारा की जा सकती है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इसके उपरांत ही क्षेत्रीय संचालक स्तर के अधिकारी के नेत्तृत्व में जाँच दल भेजे जाने की कवायद की जा सकती है।