टॉप टेन में सिवनी अस्पताल

 

(शरद खरे)

प्रदेश भर में चलाये जा रहे कायाकल्प अभियान में पहली बार सिवनी जिला टॉप टेन रैंकिंग में स्थान पा सका है। निश्चित तौर पर यह, सिवनी जिले और विशेषकर जिला अस्पताल के लिये गर्व की बात मानी जा सकती है। बारापत्थर में सिवनी का अस्पताल तत्कालीन कद्दावर मंत्री स्व.विमला वर्मा की अनुपम सौगात मानी जा सकती है। इस अस्पताल का निर्माण जब कराया गया था उसके बाद से नब्बे के दशक के आरंभ तक यह अस्पताल मरीज़ों के लिये सुविधाओं से परिपूर्ण रहा करता था। नब्बे के दशक के बाद अचानक ही सिवनी के नीति निर्धारकों के द्वारा इस अस्पताल पर ध्यान देना बंद कर दिया गया और उसके बाद से इस अस्पताल में सेवाओं का स्तर न्यूनतम स्तर तक पहुँचना आरंभ होता गया।

जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा मई माह से इस अस्पताल पर ध्यान देना आरंभ किया गया। इस अस्पताल में निर्माण कराये गये और इसकी दशा बदलने के लिये रंग रोगन का काम भी कराया गया। जनता के सहयोग से कराये गये काम अब लगभग पूर्णता  की ओर हैं। अस्पताल में लगभग सारी सुविधाएं तो उपलब्ध हैं, पर यहाँ चिकित्सकों की कमी आज भी बुरी तरह खलती है।

इस बारे में जब भी बात होती है तो जिले के नीति निर्धारकों के द्वारा प्रदेश के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ने का प्रयास किया जाता है, पर वे भूल जाते हैं कि इसी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी शायद नहीं के बराबर ही है। इसका तात्पर्य साफ है कि जिन जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं में चिकित्सकों की कमी नहीं है, वहाँ के जनप्रतिनिधियों के द्वारा अपने क्षेत्र की चिंता ईमानदारी से की जा रही है।

सिवनी का इंदिरा गांधी जिला अस्पताल प्रदेश में छटवें और संभाग में दूसरी पायदान पर आया है। अभी एक सर्वेक्षण, निरीक्षण और बाकी है। अगर इसके पहले अस्पताल प्रशासन के द्वारा अपनी गलतियों को सुधार लिया जाता है तो निश्चित तौर पर सिवनी का अस्पताल प्रदेश में अव्वल स्थान पर भी आ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो सिवनी के अस्पताल को अनेक सुविधाओं से नवाज़ा भी जा सकता है।

बहरहाल, सिवनी में आर्युविज्ञान महाविद्यालय प्रस्तावित है। इस मेडिकल कॉलेज़ का काम अभी कहाँ तक पहुँचा है इस बारे में आरोप प्रत्यारोप के दौर चले पर किसी ने भी यह बताने की जहमत नहीं उठायी कि इन आरोप प्रत्यारोपों के बावजूद भी किसी जनप्रतिनिधि के द्वारा इसके लिये प्रयास किये गये हों। आरोप प्रत्यारोप सियासी बियावान में आवश्यक माने जा सकते हैं किन्तु जिन लोगों के द्वारा सांसद, विधायकों को चुनकर संसद और विधान सभा में भेजा जाता है उनकी नैतिक जवाबदेही अपने मतदाताओं के प्रति बनती है।

यह मामला अगर केंद्र में लंबित है तो इसके लिये जिले के दोनों सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और डॉ.ढाल सिंह बिसेन सहित भाजपा के जिला और नगर अध्यक्षों को प्रयास करना चाहिये, क्योंकि केंद्र में भाजपा की सरकार है। अगर यह मामला प्रदेश में किन्हीं कारणों से लंबित है तो इसके लिये जिले के चारों विधायकों दिनेश राय, योगेंद्र सिंह, राकेश पाल सिंह और अर्जुन सिंह काकोड़िया सहित जिला एवं नगर काँग्रेस अध्यक्षों को प्रयास करना चाहिये क्योंकि प्रदेश में काँग्रेस की सरकार है।

जिला मुख्यालय में अगर मेडिकल कॉलेज़ का निर्माण हो जाता है तो निश्चित तौर पर यहाँ से पढ़कर निकलने वाले चिकित्सकों में से कुछ चिकित्सक तो सिवनी के अस्पताल में सेवाएं देने की मंशा रखेंगे। अगर ऐसा नहीं भी हुआ तो यहाँ पढ़ते समय चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ इंटरर्नशिप के दौरान मरीज़ों को मिल सकेगा। इतना ही नहीं यहाँ पढ़ाने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुभवों का लाभ भी मरीज़ों को मिल सकेगा, जिसके चलते सिवनी के मरीज़ों की नागपुर पर निर्भरता काफी हद तक कम भी हो सकेगी।

 

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