नागरिकों से सुझाव है सराहनीय पहल

 

(शरद खरे)

लगातार आठ दिन चले अतिक्रमण विरोधी अभियान के उपरांत जिला प्रशासन के द्वारा अतिक्रमण मुक्त करवायी गयी भूमि का उपयोग कैसे और किसलिये किया जाये, इसके लिये नागरिकों से सुझाव माँगे गये हैं। यह सराहनीय पहल मानी जा सकती है, इसकी सराहना की जाना चाहिये।

इस समय सोशल मीडिया का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। आज गाँव-गाँव में लोगों के हाथों में स्मार्ट फोन हैं। सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप्प, ट्विटर आदि पर लोग सक्रिय नज़र आते हैं। अब किसी भी खबर को लोगों तक सेकेण्ड्स में संप्रेषण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है सोशल मीडिया।

अतिक्रमण के चलते सिवनी की सड़कें तंग गलियों में तब्दील हो चुकीं थीं, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि तीन जिलाधिकारियों के कार्यकाल में 19 मर्तबा नोटिस दिये जाने के बाद भी एक इंच से अतिक्रमण नहीं हटवाया जा सका। जाहिर है इसके पूर्व प्रशासनिक मुखियाओं की या तो दिलचस्पी इसमें नहीं थी या फिर उनमें इच्छाशक्ति का अभाव ही रहा होगा, वरना क्या कारण है कि शहर की सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त नहीं करवाया जा सका।

वर्तमान जिलाधिकारी प्रवीण सिंह को लोग लंबे समय तक इसलिये याद रखेंगे क्योंकि उनके नेत्तृत्व में सिवनी को लगभग पच्चीस से तीस फीसदी अतिक्रमण मुक्त करवाया जा सका है। अभी शहर के अनेक हिस्सों से अतिक्रमण हटाया जाना बाकी है। अतिक्रमण विरोधी अभियान को अभी कुछ दिनों के लिये विराम दिया गया है। इस बीच में मलबा हटाये जाने की कार्यवाही को अंज़ाम दिया जायेगा।

इसके साथ ही साथ जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा एक नवाचार किया गया है, जो लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। वह यह है कि जिलाधिकारी के द्वारा नागरिकों से यह जानना चाहा गया है कि अतिक्रमण से मुक्त करवायी गयी भूमि को किस उपयोग में लाया जाये।

संभवतः पहली बार प्रशासन के द्वारा किसी मामले में नागरिकों से राय चाही गयी होगी। इसके पहले पदस्थ रहे जिलाधिकारियों के द्वारा अपनी मर्जी को ही लोगों पर थोपा गया है कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगा। सवाल यही है कि यह सब किसके लिये किया जा रहा है। जवाब साफ है कि यह सब जनता के लिये ही किया जा रहा है। अगर ऐसा है तो जनता से पूछने में गुरेज़ कैसा!

जिला कलेक्टर के फेसबुक पेज पर जिस तरह के सुझाव लोगों के द्वारा दिये जा रहे हैं उसमें भाटचारण भी प्रतीत हो रहा है पर कुछ सुझाव वास्तव में स्वागत योग्य हैं। सिवनी शहर में पार्किंग की समस्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा शहर में सुलभ शौचालयों अर्थात सार्वजनिक प्रसाधनों का अभाव है। हाथ ठेले वालों के लिये स्थान नहीं है। नाले नालियों पर कब्ज़ा होने से इनकी सफाई नहीं हो पाती है और मच्छर के साथ ही साथ दुर्गंध भी लोगों को परेशान करती नज़र आती है।

अतिक्रमण से मुक्त करवायी गये स्थानों पर कुछ कुछ दूरी पर वाहनों के लिये पार्किंग, सार्वजनिक प्रसाधनों की व्यवस्था अगर कर दी जाती है तो शहर को साफ सुथरा रखने के साथ ही साथ यातायात को व्यवस्थित किया जा सकता है। अगर आवश्यक हो तो पेड पार्किंग व्यवस्था भी जिला मुख्यालय में लागू कर दी जाये। लोग सुझाव दे रहे हैं, जिला प्रशासन की इस पर बारीक नज़र भी है तो उम्मीद की जाना चाहिये कि आने वाले दिनों में सिवनी की तस्वीर कुछ हटकर ही दिख सकती है।

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