विद्युत वितरण कंपनी की हठधर्मिता के कारण कृषक परेशान

 

 

एक तरफ सरकारें जहाँ किसानों की बेहतरी के लिये कदम उठाने का हर संभव प्रयास कर रहीं हैं वहीं सिवनी के ग्रामीण अंचलों में विद्युत वितरण कंपनी की मनमानी के चलते कृषकगण जमकर परेशान हैं।

किसानों को तय समय पर भी बिजली प्रदाय नहीं की जा रही है जिसका सीधा असर किसानों के कृषि संबंधी कार्यों पर पड़ रहा है। इसके चलते फसलें भी प्रभावित हुए बिना नहीं हैं। किसानों के द्वारा ट्रान्सफॉर्मर लगवाने के साथ ही साथ टी.सी. कनेक्शन के लिये भी भुगतान कर दिया गया है लेकिन उसके बाद भी बिजली प्रदाय के मामले में ये किसान अपने आपको ठगा हुआ सा ही महसूस कर रहे हैं।

शहरी क्षेत्र में संभव है कि बिजली प्रदाय यथावत की जा रही हो लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति उसके एकदम उलट ही है। सर्दी के इस मौसम में किसानों को सिंचाई के लिये बेहद परेशान होना पड़ रहा है। किसानों को खेतों में सिंचाई के लिये दस घण्टे बिजली देने की बात तो की जाती है लेकिन उक्त बिजली शायद कागजों पर ही प्रदाय की जा रही है। वास्तव में दो से तीन घण्टे ही किसानों को बिजली मिल पा रही है।

बिजली की इतने कम समय के लिये उपलब्धता के कारण किसान, न तो सिंचाई ही कर पा रहे हैं और न ही निश्चिंत होकर बैठ पा रहे हैं। बिजली का इंतजार करते-करते जैसे-तैसे विद्युत प्रवाह आरंभ तो होता है लेकिन इस प्रवाह को नियमित न रखा जाकर इसे बार-बार अवरूद्ध किया जा रहा है। विद्युत विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाये तो उनके द्वारा रटा रटाया जवाब दे दिया जाता है कि फीडर में फाल्ट आने के कारण विद्युत प्रवाह अवरूद्ध हो गया है।

आश्चर्यजनक बात यह है कि फाल्ट यदि एक फीडर में आता है तो संपूर्ण क्षेत्र में विद्युत प्रवाह आखिर क्यों बंद कर दिया जाता है। विद्युत प्रवाह ठप्प हो जाने के कारण सिंचाई का कार्य भी बंद हो जाता है। यह स्थिति हमारे छपारा क्षेत्र में बहुत ज्यादा है जिसके कारण किसानों मेें आक्रोश भी पनपता जा रहा है। अपेक्षा है कि विद्युत वितरण कंपनी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए किसानों के साथ भेदभाव करना भी बंद करेगी।

अविनाश ठाकुर

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