भारत से करता हूं बेहद प्यार, देशभक्त हूं पर राष्ट्रवादी नहीं : जॉन अब्राहम

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)
मुंबई (साई)। जितनी विविधता बतौर एक्टर जॉन की फिल्मों में है, उतनी ही विविधता उन्होंने बतौर फिल्म निर्माता भी बना रखी है। बतौर निर्माता फिल्म विक्की डोनरके साथ धमाकेदार शुरुआत करने के बाद जॉन ने मद्रास कैफे’, ‘परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरणऔर बाटला हाउसजैसी अलहदा फिल्मों का निर्माण किया।

वह मानते हैं कि बतौर निर्माता सफलता मिलने से फिल्म इंडस्ट्री में उनका कद पहले से बहुत बेहतर हो गया है। वह कहते हैं, ‘निर्माता बनकर मैंने अपने लिए विविधतापूर्ण सिनेमा बनाने और बतौर एक्टर इसका हिस्सा बनने के दरवाजे खोल लिए हैं। पहले मैं ऐसा नहीं कर पाता था क्योंकि मेरे पास विकल्प नहीं होते थे। पर, जब मैं निर्माता बना, मैंने तय किया कि मैं अब वही करूंगा, जो मेरा दिल करता है। वही कहानियां सुनाऊंगा, जो सुनाना चाहता था। यही वजह है कि मैंने विक्की डोनर, मद्रास कैफे, परमाणु और बाटला हाउस जैसी फिल्में बनाईं।

जॉन की अगली फिल्म अटैककी घोषणा हाल ही में हुई है। वह बताते हैं, ‘जब दूसरे फिल्म मेकर्स मेरी फिल्मों के जरिये मेरे विचारों से वाकिफ हुए, तो उन्हें लगा कि मेरे पास उन्हें ऐसी फिल्मों के प्रस्ताव लाने चाहिए, जो मुझे विचारशील एक्टर के रूप में पेश करें। यही वजह है कि अगर आप निर्माता बनने से पहले और बाद की मेरी फिल्मों के नाम देखेंगे, तो उनमें बहुत अंतर पाएंगे।

फिलहाल जॉन का ध्यान केंद्रित है साल 2020 में रिलीज होने वाली अपनी फिल्म अटैकपर, जिसमें वह पूरी तरह एक्शन से लैस अवतार में नजर आएंगे। अब जॉन अपनी फिल्मों से पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रहे हैं। वह कहते हैं, ‘अगर आप मेरे करियर के पिछले 3-4 सालों पर या आगामी 6-7 फिल्मों पर नजर डालें, तो आप समझ जाएंगे कि मैं क्या कह रहा हूं।

एक और तत्व जो जॉन की फिल्मों के जरिये सबके सामने आया है, वह है उनका देशप्रेम। इसने दर्शकों को काफी प्रभावित किया है। वह कहते हैं, ‘देखिये, मैं अपने देश से बहुत प्यार करता हूं। ऐसा भी कहा जा सकता है कि मैं अपने देश से जुड़े मामलों के प्रति बेहद जुनूनी हूं। हालांकि मेरे दिमाग में यह बात एकदम स्पष्ट है कि मैं देशभक्त हूं, राष्ट्रवादी नहीं। राष्ट्रवाद का मतलब है अपने देश से जुड़ी हर चीज से प्यार करना, भले ही वह सही हो या गलत। वहीं देशभक्ति का मतलब है अपने देश से जुड़ी तमाम चीजों से उनकी खासियत के चलते प्यार करना। देशभक्त अपने देश की गलत चीजों की आलोचना भी करता है।