होटल की हार्ड डिस्क और DVR भी गायब कर गया जीतू

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

इंदौर (साई)। वेश्यावृत्ति व मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में शामिल जीतू सोनी के लिए पुलिसकर्मी ही छापे की सूचना लीक कर रहे थे। उन्होंने यह भी बता दिया था कि पुलिस हनीट्रैप से जुड़े वीडियो फुटेज और होटल माय होम में आने-जाने वालों के बारे में जानना चाहती है। इससे अलर्ट हुए जीतू ने होटल के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क और कैमरों के डीवीआर गायब कर दिए।

जीतू सोनी पर अभी तक 25 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें मानव तस्करी, वेश्यावृत्ति, लूट, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के प्रकरण हैं। उसकी गिरफ्तारी पर 30 हजार का इनाम घोषित हो चुका और एक लाख रुपए के लिए शासन को पत्र लिख दिया गया है।

जांच में शामिल अफसर जीतू के साथ पुलिस में छिपे भेदिए को भी ढूंढ रहे हैं। उनका कहना है कि एसएसपी ने पुलिस कंट्रोल रूम पर बल बुलाया तो उन्हें यह नहीं बताया गया था कि छापा कहां मारना है। फिर भी जीतू सोनी के पास 8.30 बजे सूचना पहुंच गई कि होटल पर कार्रवाई की तैयारी हो चुकी है। एसएसपी ने बगैर बताए अफसरों को रेसीडेंसी पर बुलाया, तब भी जीतू को पता चल गया।

उसे यह भी जानकारी थी कि छापे में हनीट्रैप से जुड़े वीडियो और फोटो ढूंढे जाएंगे। होटल में कौन-कौन आता है। लड़कियां डांस करती हैं और लोग नोट लुटाते हैं इसके वीडियो भी जांचे जाएंगे। लिहाजा जीतू ने कैमरों के डीवीआर भी गायब कर दिए। अफसर अब पुलिस में छिपे भेदिए को तलाश रहे हैं।

बिल्डर की मदद से भागा

पुलिस को जानकारी मिली है कि छापे के दो दिन बाद भी जीतू निपानिया क्षेत्र की एक टाउनशिप में ही था। उसके बेटे अमित का दोस्त उसकी मदद कर रहा था। जैसे ही दूसरे थानों में केस दर्ज होने की जानकारी मिली, बिल्डर की मदद से जीतू कार से लखनऊ और फिर नेपाल भाग गया।

पुलिस बिल्डर के घर पहुंची तो वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व प्रभावशाली मंत्री के पास पहुंच गया। पुलिस उससे पूछताछ करने से भी घबरा रही है।

वर्षों पुरानी फाइल खोली

जीतू सोनी के होटल में बंधक लड़कियां आत्महत्या भी कर चुकी हैं। पुलिस को छापे में उनका रिकॉर्ड मिला है। पलासिया थाना टीआई विनोद दीक्षित के मुताबिक पश्चिम बंगाल की सोनिया ने वर्ष 2011 में जहर खा लिया था। जीतू ने दबाव प्रभाव में मामला दबा दिया। इसी तरह वर्ष 2017 में नेहा मित्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इस मामले को भी दबा दिया गया था।

पोस्टमार्टम के दौरान जीतू ने बाउंसर तैनात कर परिजन को बयान देने से मना कर दिया था। पुलिस ने दोनों केस की जांच री-ओपन की है। यह भी जानकारी मिली कि दोनों ही केस में नरेंद्र रघुवंशी ने खुद को पार्टनर और कर्मचारी बताकर बयान दर्ज कराए थे। नरेंद्र को बुधवार को गिरफ्तार किया गया था

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