खराब सड़कों की शिकायत पर फैसला देगी स्थायी लोक अदालत

 

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अब होंगे लोकोपयोगी सेवा के अध्यक्ष

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। विधि विभाग के द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों को ही लोकोपयोगी सेवाओं के लिये लगने वाली स्थायी अदालतों का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। इस आदेश के जारी होने के बाद इसके अध्यक्ष अब एक दर्जन से ज्यादा लोक उपयोगी सेवाओं में जनता से जुड़ी सेवाओं की शिकायत सुन सकेंगे।

राज्य सचिवालय स्थित विधि विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि अब आम जनता भी सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखकर दे सकेंगे। प्राधिकारण के द्वारा इन शिकायतों की सुनवायी कर इसका निराकरण किया जायेगा। यहाँ से जारी आदेश पर अगर संबंधित अधिकारियों के द्वारा अमल नहीं किया जाता है तो इसका निराकरण माननीय न्यायालय की तरह ही किया जायेगा। इसमें जेल भेजने के प्रावधान भी निहित हैं।

सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप सचिव धर्मेंद्र कुमार के द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश जारी कर लोक उपयोगी सेवाओं के निराकरण के लिये स्थायी लोग अदालतों को हरमाह के अंतिम शनिवार को लगाये जाने के निर्देश दिये हैं। इस स्थायी लोक अदालत के सदस्य तौर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग के भवन एवं सड़क प्रभाग के कार्यपालन यंत्री होंगे।

क्या है स्थायी लोक अदालत : विधि के जानकारों के अनुसार विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22बी के अंतर्गत स्थायी लोक अदालत का गठन प्रत्येक जिले में किया जायेगा। स्थायी लोक अदालत द्वारा जनहित सेवाओं से संबंधित विवादों का निस्तारण मुकदमा दायर होने से पहले आपसी सुलह – समझौते के आधार पर किया जायेगा। जनहित सेवाओं से पीड़ित कोई भी व्यक्ति अपने विवादों के निपटारे के लिये स्थायी लोक अदालत में आवेदन कर सकता है।

स्थायी लोक अदालत और अस्थायी लोक अदालत में अंतर : स्थायी लोक अदालत में आप अपना मामला सीधे ले के जा सकते हैं, वहीं अस्थायी लोक अदालत में आपका मामला कोर्ट की अनुमति के बग़ैर नहीं जा सकता। स्थायी लोक अदालत सिर्फ एक करोड़ तक के मसलों का निपटारा कर सकती है, लेकिन अस्थायी लोक अदालत पर ऐसी कोई सीमा नहीं है।

स्थायी लोक अदालत के अंदर आप का मामला बातचीत से हल न होने पर वह अपना निर्णय सुना सकती है जो कि दोनों पक्षों पर बाध्य होगा। अगर ऐसी बात अस्थायी लोक अदालत में होगी तब आप को कोर्ट जाना पड़ेगा, क्योंकि यह लोक अदालत सिर्फ मध्यस्तता करने तक ही अधिकृत है। इसके अलावा दोनों अदालतों का जो भी फ़ैसला या निर्णय होगा आप उसके लिये बाध्य होंगे।

इनका होगा निराकरण : विधि के जानकारों के अनुसार विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 22ए की उपधारा (ए) में जनहित सेवाओं के बारे में बताया गया है जिनसे संबंधित विवादों का निपटारा स्थायी लोक अदालत में होता है।

विधि वेत्ताओं के अनुसार इसमें सड़क, पानी, हवाई सेवाएं, यातायात सेवाओं से संबंधित विवाद, डाकघर या टेलीफोन सेवाओं से संबंधित विवाद, बिजली, प्रकाश या जलसेवा से संबंधित विवाद, लोक सफाई व स्वच्छता प्रणाली से संबंधित विवाद, अस्पताल या औषद्यालय में सेवाओं से संबंधित विवाद, बैंकिंग सेवाओं से संबंधित विवाद, बीमा सेवाओं से संबंधित विवाद सहित शिक्षा, शैक्षणिक संस्थानों, हाऊसिंग और रियल स्टेट से संबंधित विवादों का निपटारा होगा।