बाज़ार बंद लेकिन फैल रहा कचरा!

 

 

सिवनी में शनिवार के दिन मुख्य बाज़ार बंद रहा करता है, ऐसा शायद सिर्फ कागजों तक ही सीमित है और इसी तरह की व्यवस्था से मुझे शिकायत है।

सप्ताह के अन्य दिनों में बुधवारी बाज़ार क्षेत्र में भारी गहमा गहमी रहा करती है। लगभग तमाम दुकानें खुली रहती हैं जिनमें ग्राहकों की भीड़ देखी जा सकती है। सप्ताह में शनिवार के दिन दुकानों को बंद रखा जाना चाहिये लेकिन इस दिन भी बुधवारी बाज़ार क्षेत्र में लगभग सत्तर प्रतिशत दुकानों को खुला हुआ देखा जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्र के लोग यह सोचकर शनिवार को बाज़ार करने के लिये सिवनी नहीं आते कि इस दिन दुकानें बंद ही होंगी लेकिन अधिकांश दुकानें खुली ही रहती हैं। इसके चलते शनिवार को भी बुधवारी बाज़ार की सड़कों पर लगने वाले जाम से लोगों को निजात नहीं मिल पाती है। यही नहीं इस दिन दुकानों का कचरा भी सड़कों पर दुकानदारोें के द्वारा फैला दिया जाता है जिसके कारण गंदगी बिखरी हुई दिखायी देती है।

शहर वासियों को उम्मीद थी कि नगर पालिका के द्वारा दुकानों के समीप डस्टबिन की व्यवस्था की जायेगी लेकिन ऐसा हो नहीं सका है। अधिकांश दुकानदारों के द्वारा भी अपने जागरूक होने का परिचय नहीं दिया जा रहा है शायद तभी उनके द्वारा दुकान से निकला कचरा सड़क पर ही फेंक दिया जाता है। दुकानदारों को चाहिये कि यदि नगर पालिका के द्वारा डस्टबिन की व्यवस्था नहीं की गयी है तो उनके द्वारा कम से कम इतना प्रयास अवश्य किया जाये कि सड़कों पर कचरा न फैल सके।

वे दुकानें जो सप्ताह के सभी दिन खुली रहकर ग्राहकों की सेवा कर रहीं हैं उन दुकानों में कार्यरत श्रमिकों की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि उन्हें किसी भी दिन अवकाश नहीं मिल पाता है, इसे श्रमिकों का शोषण ही कहा जायेगा लेकिन संबंधितों का ध्यान इस ओर न जाने के कारण श्रमिक भी बेहद परेशान हैं। अपेक्षा है कि दुकानदारों के द्वारा जागरूकता दिखाने के साथ ही संबंधितों के द्वारा उचित व्यवस्था बनायी जायेगी ताकि किसी को कोई दिक्कत न हो।

उमेश त्रिपाठी