पानी में अंकुरित होकर खराब हो रही खुले में रखी धान!

 

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जिले भर में सरकारी खरीद केंद्रों में खुले में रखी धान हाल ही में हुई बारिश एवं रखरखाव के अभाव में अंकुरित होने के साथ ही साथ खराब हो रही है। खरीद केंद्रों में सैकड़ों क्विंटल धान बर्बाद होते हुए आसानी से देखी जा सकती है।

ज्ञातव्य है कि सिवनी जिले में बरघाट को धान का कटोरा माना जाता है। जिले में सबसे अधिक धान का उत्पादन बरघाट क्षेत्र में होता है। बरघाट क्षेत्र में बनाये गये खरीद केंद्रों में धान खुले में ही बिना किसी इंतजाम के रखी हुई देखी जा सकती है। इसके अलावा धान खरीद केंद्रों में खुले में बने स्टेग के आसपास भी धान को खराब होते देखा जा सकता है।

बरघाट क्षेत्र के अनेक खरीद केंद्रों में बीते दिनों हुई बारिश में खुले में पड़ी धान मिट्टी के साथ मिलकर लुगदी के रूप में पड़ी हुई है। यह धान अब किसी काम की नहीं रह गयी है। बारिश के पानी में मिट्टी में मिल चुकी धान का बड़ा हिस्सा खरीद की गयी धान का भी है। इसके अलावा किसानों की धान भी इसी तरह पड़ी दिखायी दे रही है।

अनेक किसानों ने बताया कि उनके मोबाईल पर मैसेज आये एक महीना से ज्यादा बीत जाने के बाद भी उनकी धान की खरीद में धान उपार्जन केंद्र में पदस्थ कर्मचारी लापरवाही बरत रहे हैं। किसानों ने बताया कि खरीद केंद्र में धान खरीदी में हीला हवाला के चलते हाल ही में हुई बारिश में उनकी धान गीली भी हो चुकी है।

धान उपार्जन केंद्रों में अनेक स्थानों पर सरकारी खरीद एवं किसानों के द्वारा लायी गयी धान के बोरे नीचे से गीले हो जाने के बाद अब उन्हें उल्टा कर रख दिया गया है ताकि धान की नमी को समाप्त किया जा सके। दूसरी ओर बारिश के बाद धूप की तल्खी गायब होने के कारण धान कब तक सूख पायेगी यह भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि पिछले साल भी बरघाट क्षेत्र में खुले में रखी धान जनवरी माह में असमय हुई बारिश में गीली हो गयी थी। धान केंद्रों का बरघाट के काँग्रेसी विधायक अर्जुन सिंह काकोड़िया के द्वारा निरीक्षण किये जाने के बाद भी साल भर बीत जाने के बाद अब तक किसी जिम्मेदार पर कार्यवाही न होना भी आश्चर्य जनक माना जा रहा है।

पिछले साल गीली हुई धान से सबक न लेकर इस साल भी खरीद केंद्रों में धान को बारिश, पानी से सुरक्षित रखने के लिये मुकम्मल व्यवस्थाएं नहीं की गयी हैं। और तो और जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा भी खरीद केंद्रों का निरीक्षण कर इसके लिये जवाबदेह अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गयी है।