किराए की टैक्सी में मुंबई तक सफर . . .

हर शहर में एटीएम क्लोनिंग कर साइबर ठगी

(ब्‍यूरो कार्यालय)
जबलपुर (साई)। किराए की कार में प्रतापगढ़ से मुंबई व देश के अन्य शहरों का सफर करते हुए हाइटेक साइबर अपराधी शहर-दर-शहर एटीएम की क्लोनिंग कर लोगों के बैंक खाते खाली करते रहे। प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश निवासी साइबर अपराधियों ने अधारताल क्षेत्र में भी एटीएम की क्लोनिंग कर दो बैंक खातों को खाली कर दिया था।

साइबर अपराधी तीसरी बार प्रतापगढ़ से शहर में वारदात करने पहुंचे जिनमें से एक को क्राइम ब्रांच व अधारताल पुलिस ने दबोच लिया। पुलिस अधीक्षक अमित सिंह ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में घटनाक्रम का खुलासा किया।

अगस्त और दिसंबर 2019 में की थी घटनाएं

अपराधियों ने महाकोशल कॉलोनी अधारताल निवासी जनार्दन सिंह (61) के एटीएम का क्लोन बनाकर 26 अगस्त को उनके खाते से 50 हजार स्र्पए उड़ा दिए। इसी प्रकार 26 दिसंबर को सीओडी कॉलोनी सुहागी निवासी विक्रांत शर्मा (37) के 26 हजार स्र्पए पार कर दिए थे। दोनों घटनाओं में ठगी का एक जैसा तरीका अपनाया था। एटीएम मशीन से रकम निकालने पहुंचे खाता धारकों की मदद करने के बहाने उनके एटीएम की क्लोनिंग करते हुए रकम पार कर दी।

गिरफ्तार व फरार आरोपित

पुलिस ने ग्राम तिलौरी सगरा सुंदरपुर थाना लालगंज अझारा जिला प्रतापगढ़ निवासी अब्दुल कलाम खान (39) पिता कमालुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इसी जिले के पतुर्की गांव निवासी आरिफ खान, ओम प्रकाश जायसवाल ग्राम सगरा सुंदरपुर, सैय्यद खान उर्फ शहजाद ग्राम तिलौरी, जाहिद अली निवासी ग्राम मकई, वसीम निवासी ग्राम पतुर्की तथा नसीरूद्दीन निवासी ग्राम सगरा सुंदरपुर अधारताल क्षेत्र से भागने में कामयाब रहे।

गिरफ्तार आरोपित के कब्जे से 1 लैपटॉप, 1 स्कैमर, 1 चार्जर, 32 पुराने एटीएम, 2 मोबाइल, 10 हजार नकद और स्विफ्ट डिजायर कार (एमएच-03 बीसी 9998) जब्त की गई। जब्त कार मंुबई के एक ट्रैवल एजेंट की है जिसे अब्दुल कलाम ने किराए पर ली थी।

4 माह से लोकेशन का पता लगा रही थी पुलिस

एटीएम क्लोनिंग से ठगी की घटना को अंजाम देने वाले आरोपित घटना के बाद शहर स्थित एक होटल में ठहरे थे। शिकायत मिलने के बाद तलाश में जुटी पुलिस ने तकनीकी पहलु पर जोर दिया और आरोपितों का मोबाइल नंबर प्राप्त किया। बीती रात उनकी लोकेशन पनागर में मिली और मुखबिर ने भी कुछ संदिग्ध लोगों की सूचना दी।

वारदात का तरीका

अब्दुल कलाम मुंबई में किराए की टैक्सी चलाता था। उसका भाई सैय्यद गिरोह से जुड़ गया था। कुछ साल पहले सैय्यद ने ही कलाम को गिरोह में शामिल कर दिया और वह हर माह करीब 1 लाख स्र्पए कमाने लगा, जिससे उसका लालच और बढ़ता गया। मंुबई से किराए की टैक्सी लेकर गिरोह के सदस्य प्रतापगढ़ से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों में एटीएम क्लोनिंग के जरिए साइबर ठगी कर प्रतापगढ़ चले जाते थे।