आखिर कब हो पायेगा आशादीप का हिसाब सार्वजनिक!

सवा चार साल बीते, चंदा की राशि व खर्च नहीं हो पाये सार्वजनिक!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। सिवनी के आशादीप विशेष विद्यालय को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने की गरज से की गयी कवायद चार साल बाद भी आधी अधूरी ही प्रतीत हो रही है। दृष्टि बाधित बच्चों के इस स्कूल के लिये किये गये चंदे का हिसाब तीन कलेक्टर्स नहीं दे पाये हैं, जिससे अब इस मामले में चर्चाओं का बाज़ार गर्मा रहा है।

ज्ञातव्य है कि तत्कालीन जिला कलेक्टर भरत यादव के द्वारा आशादीप विशेष विद्यालय को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन 14 नवंबर 2015 को करवाया गया था। इस कार्यक्रम के लिये सरकारी स्तर पर टिकिट बेचे जाने की बातें भी सामने आयीं थीं। इसके अलावा सरकारी नुमाईंदों के द्वारा इस कार्यक्रम की आड़ में जमकर चंदा भी किया गया था।

इस कार्यक्रम में गायक अभिजीत सहित बॉलीवुड के अनेक लोगों के द्वारा अपनी प्रस्तुति दी गयी थी। कार्यक्रम के दौरान गायक अभिजीत के द्वारा दिया सहमति पत्र भी चर्चा का विषय बना जिसमें उनके द्वारा कार्यक्रम के पूर्व, मध्य और अंत में महंगी और निश्चित साल पुरानी शराब की माँग को रखा गया था। उस समय लोगों ने यह भी कहा था कि दृष्टि बाधित बच्चों के लिये किये गये चंदे से किसी गायक को शराब पिलाने से बेहतर तो यह था कि किसी अन्य सात्विक भजन गायक को बुलाया जाकर कार्यक्रम करवा लिया जाता।

बहरहाल, इस कार्यक्रम के बाद कितनी राशि टिकिट के जरिये, कितनी चंदे के जरिये एकत्र की गयी इस बारे में कभी भी सार्वजनिक तौर पर आशादीप विशेष विद्यालय का संचालन करने वाली समिति के द्वारा कुछ भी नहीं कहा गया। इस समिति के सदस्यों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार उन सभी की इच्छा के विपरीत तत्कालीन जिला कलेक्टर भरत यादव के द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के हाथ में संस्था की सारी कमान सौंप दी गयी थी।

सवा चार सालों से आशादीप विशेष विद्यालय के संचालन के लिये बीच – बीच में सोशल मीडिया पर भी सहयोग की अपीलें की जाती हैं, जिससे नागरिक चौंक जाते हैं, क्योंकि जिस संस्था को आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये एकत्र किये गये हों उस संस्था के संचालन के लिये अब भी जन सहयोग क्यों माँगा जा रहा है!

बताया जाता है कि चंदे का हिसाब किताब न मिल पाने के कारण इस तरह की स्थिति निर्मित हो रही है कि इस विद्यालय को चलाने के लिये जन सहयोग की दरकार अभी भी महसूस की जा रही है। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि जितना चंदा 14 नवंबर 2015 के कार्यक्रम के लिये उगाहा गया था, उसके ब्याज में इस तरह के कम से कम आधा दर्जन विद्यालयों का संचालन बहुत ही आसानी से किया जा सकता था।

यह बात भी शायद ही कोई जानता हो कि इस विद्यालय को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिये 14 नवंबर (बाल दिवस) 2015 को हुए कार्यक्रम के लिये जितना चंदा उगाहा गया था उसमें से कितनी राशि को सावधि जमा की मद में किस बैंक में जमा करवाया गया है! इतना ही नहीं इस पर कितना ब्याज मिल रहा है! उस ब्याज का क्या किया जा रहा है! शाला के संचालन के लिये कितनी राशि किस मद में व्यय की जा रही है! जैसे प्रश्न अभी भी अनुत्तरित ही हैं।