(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से दसवीं कक्षा तक में प्रोजेक्ट व प्रैक्टिकल आधारित पढ़ाई होगी। दक्षिण कोरिया की तर्ज पर प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में स्टीम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्ट्स व मैथामेटिक्स) मॉड्यूल शामिल होगा।

नए शिक्षण सत्र से स्कूल शिक्षा विभाग पहली से दसवीं कक्षा में स्टीम मॉड्यूल को लागू करने जा रहा है। इससे स्कूली बच्चों को एक ही विषय की पढ़ाई में कई विषयों की जानकारी मिलेगी।

स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए एक राज्य स्तरीय समिति बनाई है। समिति की अध्यक्ष स्कूल शिक्षा की प्रमुख सचिव हैं। विभाग इस सत्र से प्रदेश के 1500 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस मॉड्यूल को लागू करेगा। इसे लागू करने के लिए विभाग करिकुलम मैपिंग कर रहा है।

विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मप्र देश का पहला राज्य होगा, जहां के सरकारी स्कूलों में यह मॉड्यूल लागू किया जाएगा। इससे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे करीब डेढ़ लाख विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा। विभाग ने करीब 200 अधिकारियों व शिक्षकों को दक्षिण कोरिया के स्कूलों का अवलोकन कराने के लिए दौरा कराया था। इस पाठ्यक्रम को स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

क्या है स्टीम : स्टीम एक तरह का पाठ्यक्रम है, जो स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग व मैथेमेटिक्स) से थोड़ा अलग है। स्टीम मॉड्यूल में कला भी शामिल है। इससे बच्चों को सभी विषयों का एक साथ ज्ञान होगा।

प्रोजेक्ट व प्रैक्टिकल आधारित पढ़ाई होगी : सरकारी स्कूलों में अभी तक ज्वॉयफुल लर्निंग, दक्षता उन्नयन आधारित शिक्षण दिया जा रहा था। अब हर विषय में प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल और गतिविधि शामिल होगी। अब शिक्षक सिर्फ किताब ही नहीं, बल्कि किसी भी टॉपिक का प्रयोग कर बच्चों को सीखाएंगे। अगर पर्यावरण को पढ़ाया जाएगा तो उसे स्टोरी के रूप में विकसित कर पढ़ाया जाएगा।