अनफिट बसों में खतरे की सवारी गांठ रहे यात्री!

 

बस की विंड स्क्रीन गायब, पर सीना ताने दौड़ रही बस!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। भले ही परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के द्वारा सवारी वाहनों पर कठोर कार्यवाही का दंभ भरा जा रहा हो पर जमीनी हकीकत कुछ और बयां होती दिख रही है। सवारी ढोने वाली यात्री बसों में अनेक बस इस तरह की हैं, जो पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, या अनफिट हैं।

मेलेठेले, तीज त्यौहारों आदि के अवसर पर यात्री बसों में भेड़ बकरियों के मानिंद भरे यात्री सबको दिखायी देते हैं, पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की नज़रें इन पर नहीं पड़ पाती हैं। यही आलम बस की फिटनेस का रहता है। अनफिट बसें सड़क का सीना चीर रहीं हैं पर इनकी ओर देखने की फुर्सत किसी को नहीं मिल पा रही है।

परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और जिन थाना क्षेत्रों से ये सवारी वाहन गुजरते हैं उनकी कथित अनदेखी का भोगमान यात्रियों को भोगने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यात्री बस में किराया सूची चस्पा न होने के कारण यात्रियों को परिचालक या एजेंट के द्वारा माँगी गयी राशि को अदा करने पर ही मजबूर होना पड़ रहा है।

यात्री बसों को लगेज कॅरियर में भी तब्दील कर दिया गया है। अधिकांश यात्री बसों में इतना सामना लदा होता है मानो ये सवारी वाहन नहीं लगेज वाहन हों। कोरियर वालों के साथ सांठगांठ के चलते यात्री वाहनों में आवश्यकता से ज्यादा सामान भरना बस ऑपरेटर्स का प्रिय शगल बनकर रह गया है।

परिवहन विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसी तरह का एक वाहन जीजे 18 एवी 2077 को देखने पर प्रकाश में आया। छिंदवाड़ा से सिवनी होकर बालाघाट के बीच चलने वाली इस यात्री बस के सामने का शीशा (विंड स्क्रीन) पूरी तरह टूट चुका है। सर्दी के मौसम में बिना शीशे के इस बस को चालक के द्वारा किस तरह चलाया जा रहा होगा यह शोध का ही विषय है।

प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने हाल ही में प्रदेश में बस माफिया पर शिकंजा कसने की बात कही है। इससे उम्मीद जतायी जा रही है कि बिना परमिट, स्टेट कैरिज के परमिट के बिना ही स्थान – स्थान से सवारियां भरने और उतारने वाले वाहनों पर कार्यवाही हो सकेगी।

सूत्रों का कहना था कि जिला प्रशासन के द्वारा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय सिवनी में कुल जमा परमिट, यात्री वाहनों के फिटनेस आदि दस्तावेजों के आधार पर सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों से इसका मिलान अगर करवा लिया जाये तो दूध का दूध पानी का पानी हो सकता है। आये दिन होने वाली जाँच में उन वाहनों पर ही गाज गिरती है जो वाहन अधिकारियों को चौथ देने में आनाकानी करते नज़र आते हैं।

सूत्रों ने यह भी कहा कि अगर कोई दुर्घटना घटती है तब उसके बाद परिवहन विभाग या यातायात विभाग सक्रिय होने का स्वांग रचता दिखता है। इस तरह की यात्री बस जो सड़कों पर चलने के योग्य हैं ही नहीं उन वाहनों को तो तत्काल प्रभाव से ऑफ रोड कर दिया जाना चाहिये।