चार साल में भी पूरी नहीं हो पायी जलावर्धन योजना!

 

साल भर में काँग्रेस ने भी नहीं किये इसके लिये संजीदा प्रयास!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नगर पालिका परिषद का कार्यकाल 10 जनवरी को पूरा हो रहा है। इसके बाद भी भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा नवीन जलावर्धन योजना का काम चार सालों के बाद भी पूरा नहीं कराया जा सका है। लगातार दूसरी बार यह हुआ है कि भाजपा शासित नगर पालिका की महात्वाकांक्षी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पायी हैं।

नगर पालिका परिषद के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भीमगढ़ जलावर्धन योजना की पूरक (नवीन) जलावर्धन योजना के लिये पालिका और महाराष्ट्र के शोलापुर की लक्ष्मी इंजीनियरिंग के बीच मार्च 2015 में अनुबंध हुआ था, जिसके तहत ठेकेदार फर्म को इसका काम 11 माह में पूरा करना था।

सूत्रों ने बताया कि इस योजना के क्रियान्वयन में ठेकेदार के द्वारा नगर पालिका के जिम्मेदारों को पूरी तरह साधा जाकर मनमाने तरीके से काम कराया गया था। इस योजना में तत्कालीन सीएमओ नवनीत पाण्डेय के द्वारा की गयी जाँच और जिला स्तरीय जाँच में निर्माण के लिये प्रयोगशाला नहीं पाये जाने के साथ ही साथ अन्य विसंगतियां भी पायी गयी थीं। इसके बाद राज्य स्तर पर करायी गयी जाँच में सब कुछ अप टू द मार्क पाया गया और ठेकेदार को क्लीन चिट दे दी गयी थी।

इस योजना के लिये तत्कालीन निर्दलीय एवं वर्तमान में भाजपा के विधायक दिनेश राय के द्वारा समय सीमा तय की गयी थी। उनके द्वारा तय की गयी समय सीमा से अब तक 681 दिन ज्यादा हो चुके है। इतना ही नहीं पिछले साल फरवरी माह में जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा भी जलावर्धन योजना को पूरा किये जाने के लिये तय समय सीमा से 315 दिन ज्यादा होने के बाद भी अब तक यह योजना पूरी तरह आरंभ नहीं हो पायी है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि नवीन जलावर्धन योजना को तत्कालीन शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के द्वारा दी गयी इमदाद से ही कराया जा रहा था। अब जबकि कमल नाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं इसलिये लोगों को लगा था कि जिले के काँग्रेसी नेता इस मामले में दिलचस्पी लेकर इसे पूरा करवाकर इसका लोकार्पण मुख्यमंत्री के हाथों से करवा सकेंगे।

विडंबना ही कही जायेगी कि 2015 में काम आरंभ होने के बाद चार सालों तक गर्मी के मौसम में शहर में पानी की त्राहि त्राहि मची रही पर भाजपा शासित नगर पालिका परिषद एवं विपक्ष में बैठी काँग्रेस के द्वारा भी इस योजना की सुध नहीं ली गयी, जिसके कारण ठेकेदार मनमानी पर पूरी तरह उतारू रहा।

करना है पुरानी योजना का संधारण : सूत्रों की मानें तो इस योजना के पूरा होने के बाद जब नगर पालिका के द्वारा इस योजना को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा, उसके बाद भीमगढ़ जलावर्धन योजना के संधारण का काम भी लक्ष्मी इंजीनियरिंग को ही करना होगा।

मशीनें और सामग्री खरीदने के प्रस्ताव : 08 जनवरी को इस परिषद के संभवतः अंतिम साधारण सम्मेलन में गुपचुप तरीके से भीमगढ़ जलावर्धन योजना के लिये मशीनों की खरीद और अन्य सामग्री की खरीद का प्रस्ताव लाया गया था, जिसे गिरा दिया गया। 

मॉडल रोड है अधूरी : सूत्रों ने कहा कि इसके पहले 2013 में आरंभ करायी गयी मॉडल रोड का काम छः सालों के बाद भी पूरा नहीं कराया जा सका है। जलावर्धन योजना इस परिषद तो मॉडल रोड इसके पहले वाली परिषद की महत्वाकांक्षी योजना थी। विडंबना ही कही जायेगी कि दोनों ही परिषदों के द्वारा अपने – अपने कार्यकाल की महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरा करने में दिलचस्पी नहीं दिखायी गयी।