बस संचालकों की मनमानी चरम पर

 

जगह-जगह खड़ी यात्री बसें मचा रहीं धमाल

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। शहर में बस संचालकों पर किसी का बस नहीं रह गया है। शहर भर को मानो अघोषित बस स्टैण्ड बना लिया गया है यात्री बस संचालकों के द्वारा। जिसका जहाँ मन होता है वहाँ यात्री बस खड़ी कर सवारियां भरी और उतारी जा रही हैं।

सिवनी शहर के अंदर प्रवेश करते समय इन बसों की फर्राटामार रफ्तार और यहाँ से अन्य शहरों के लिये गमन करते समय, सवारियों की तलाश में कछुए की मानिंद रेंगते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ना इन बसों की और इनके संचालकों की पहचान है। ये बसें जब सिवनी से अन्य शहरों की ओर गमन कर रही होती हैं तब इनका रेंगते हुए बढ़ना किसी सिरदर्द से कम नहीं होता है। कई बार ऐसी बसों के चालकों को लोगों के द्वारा खरी खोटी भी सुनते हुए देखा जा सकता है लेकिन ऐसा लगता है कि वे अपने लोभी बस संचालकों के गुलाम मात्र हैं।

नागरिकों का कहना है कि ऐसी बसों पर सख्ती से कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है ताकि उन बस संचालकों की अघोषित गुण्डागर्दी से शहर वासियों को निजात दिलायी जा सके। ये बस संचालक अपनी बसों के माध्यम से जब रेंगते हुए विभिन्न स्थानों से सवारियां बटोर रहे होते हैं तब यदि इनके पीछे गंभीर मरीज़ को लेकर एंबुलेंस भी आ जाये और वह एंबुलेंस, अपने मरीज़ को चिकित्सालय तक शीघ्र पहुँचाने के लिये साइड माँग रही हो तब भी ये बसें उन एंबुलेंस को आगे निकलने के लिये जगह नहीं देती हैं।

नागरिकों की मानें तो सिवनी के सबसे व्यस्ततम क्षेत्र बुधवारी में भी इन बसों की मनमानी जारी रहती है। शहर के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले इस इलाके में यदि बस संचालक को कोई सवारी नज़र आ जाती है तो ये अपनी बसों को इस क्षेत्र में तब तक रोककर रखते हैं जब तक कि पूरी सवारी इनकी बसों में चढ़ न जाये।

मजे की बात तो यह है कि यातायात विभाग के सिपाही इन बस संचालकों के सामने निरीह प्राणी के मानिंद ही नज़र आते हैं जो सीटी तो बजाते रहते हैं लेकिन बस चालक पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। इस दौरान बस चालक की मुस्कुराहट साफ बताती है कि बस संचालक की जेब में शायद यातायात विभाग के साथ ही साथ परिवहन विभाग भी आ चुका है और नियम कायदों का उसके ऊपर कोई असर पड़ने वाला नहीं है।

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