पवन गुप्ता के नाबालिग होने के दावे को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)
नई दिल्‍ली (साई)। सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस में दोषी ठहराए गए पवन गुप्ता की नाबालिग होने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। आपको बता दें कि पवन ने याचिका दाखिल कर कहा था कि वह अपराध के वक्त नाबालिग था। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि अगर आप इस तरह अर्जी दाखिल करते रहेंगे तो यह अंतहीन प्रक्रिया हो जाएगी।

3 जजों की बेंच का फैसला

जस्टिस भानुमति की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने पवन की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला दोपहर ढाई बजे तक के लिए सुरक्षित कर लिया था। पवन ने सुप्रीम कोर्ट को दी अर्जी में कहा कि वह दिल्ली हाई कोर्ट को भी यह बता चुका है, लेकिन हाई कोर्ट ने इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 दिसंबर 2019 की सुनवाई में इस दलील को खारिज करते हुए पवन के वकील पर 25 हजार का जुर्माना भी लगाया था।

पवन के वकील ने यह रखी दलील

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पवन गुप्ता की ओर से उनके वकील एपी सिंह ने दलील दी थी कि दिसंबर 2012 में जब इस अपराध को अंजाम दिया गया था तब पवन गुप्ता नाबालिग था और उसकी दलील को हाई कोर्ट ने गलत तरीके से नकार दिया था। पवन गुप्ता की ओर से निचली अदालत में यह दलील पेश नहीं की जा सकी थी। तब वह वकील नहीं थे। इस मामले में संबंधित अथॉरिटी को कहा जाए कि पवन को फांसी न दी जाए।

कोर्ट के तीखे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान पवन के वकील ने कहा कि पवन की जन्मतीथि 8 अक्टूबर 1996 है और इस तरह दिसंबर 2012 को जब अपराध हुआ था तब वह नाबालिग था। इसके लिए स्कूल का सर्टिफिकेट पेश किया गया और कहा गया कि ये दस्तावेज नए फैक्ट हैं। लेकिन जस्टिस आर. भानुमति ने सवाल किया कि ये दस्तावेज 2017 का है और कोर्ट तब तक सजा दे चुकी थी। एपी सिंह ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर इस दस्तावेज को रेकॉर्ड पर नहीं रखा और ये साजिश हुई है।

अदालत ने तब सवाल किया कि लेकिन रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई के दौरान भी आपने यही सवाल उठाया था और फिर सवाल उठा रहे हैं। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रिव्यू पिटिशन के सुनवाई के दौरान ये सवाल उठाया गया था लेकिन कोर्ट ने रिव्यू पिटिशन 9 जुलाई 2018 को खारिज कर दी थी। जस्टिस भानुमति ने कहा कि आपने पहले भी मुद्दा उठाया और खारिज हो गया इस तरह आप अर्जी दाखिल करते रहेंगे तो अंतहीन प्रक्रिया हो जाएगी। आप पहले से ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में ये मुद्दा उठा चुके हैं।

पवन की रिव्यू पिटिशन हो चुकी है खारिज

सरकारी वकील तुषार मेहता ने कहा कि पवन का जन्म प्रमाण पत्र पेश किया गया था और इससे साबित हुआ था कि वह नाबालिग नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 में रिव्यू पिटिशन पर फैसला दिया था और नाबालिग होने का दावा खारिज किया था। कोर्ट ने कहा था कि इस आधार पर रिव्यू की जरूरत नहीं है। दलील के बाद कोर्ट ने लंच के बाद फैसला सुनाने के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था। लंच के बाद सुप्रीम करो्ट ने अपना फैसला सुनाया और अर्जी खारिज कर दी। पवन, मुकेश, अक्षय और विनय की ओर से दाखिल रिव्यू पिटिशन पहले से खारिज हो चुकी है।

16 दिसंबर, 2012 को हुई थी दरिंदगी

याद रहे कि 16 दिसंबर, 2012 को एक साइकोथेरपी इंटर्न निर्भया के साथ हुई जघन्य वारदात में शामिल छह दोषियों में एक को घटना के वक्त नाबालिग होने का फायदा मिल चुका है और वह महज तीन साल की सजा काटकर जेल से निकल चुका है जबकि एक दोषी राम सिंह ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी। शेष चार दोषियों, मुकेश, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता को फांसी पर लटकाने के लिए 1 फरवरी का डेथ वॉरंट जारी हुआ है।

फांसी टालने पर तुले हैं सारे दोषी

दिल्ली के पटिलाया हाउस कोर्ट से दुबारा जारी हुए डेथ वॉरंट में फांसी का समय सुबह 6 बजे तय किया गया है। इससे पहले 22 जनवरी का डेथ वॉरंट जारी हुआ था, तभी दोषी मुकेश ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल कर दी थी। हालांकि, जब तिहाड़ जेल अधिकारियों ने कोर्ट को सूचना दी कि मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी तो कोर्ट ने 1 फरवरी का नया डेथ वॉरंट जारी किया। इसी क्रम में पवन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर निर्भया से दरिंदगी के वक्त खुद के नाबालिग होने की गुहार लगाया। वहीं, पवन, विनय और अक्षय के पास अभी दया याचिका दाखिल करने का भी विकल्प बचा है।