परीक्षाएं सिर पर, इधर सम्मान समारोह में व्यस्त रहेंगे शिक्षक!

 

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बेहतर होता प्रशस्ति पत्र शालाओं में भेज, प्राचार्य के जरिये कराते वितरित!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। मेरी शाला मेरी जवाबदारी अभियान के तहत अपनी सहभागिता निभाने वाले शिक्षकों के सम्मान का मामला अब शिक्षकों के बीच ही चर्चा का विषय बन चुका है। इधर, परीक्षाएं सिर पर हैं और दूसरी ओर शिक्षकों को सम्मान समारोहों में व्यस्त रखने की बात भी सामने आ रही है।

ज्ञातव्य है कि पूर्व संभागायुक्त राजेश बहुगुणा के द्वारा मेरी शाला मेरी जवाबदारी अभियान का आगाज़ किया गया था। इस अभियान के तहत जो शिक्षक जिस शाला में अध्यापन कार्य कराता है उसे उसी शाला में विद्यार्थियों के हितों के लिये कुछ सामग्री दान देने के लिये प्रेरित किया जा रहा है।

शिक्षकों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार अभियान में जो हो रहा था वहाँ तक तो ठीक था, पर अब शालाओं से ही चंदा एकत्र किया जाकर शिक्षकों के सम्मान की कवायद को लेकर शिक्षकों में रोष और असंतोष पनपता दिख रहा है। शिक्षक इससे खफा भी नज़र आ रहे हैं।

एक शिक्षक ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि शिक्षकों के द्वारा इस अभियान में अपनी सहभागिता दी गयी है, यह बात स्वागत योग्य है किन्तु परीक्षाएं जब अत्यंत समीप आ चुकी हैं तब सम्मान समारोह का आयोजन कैसे किया जा रहा है!

उक्त शिक्षक का कहना था कि जिला शिक्षा अधिकारी, बीआरसी सहित अन्य अधिकारियों को क्या यह भान नहीं है कि परीक्षाएं सिर पर हैं, बोर्ड परीक्षाएं होने वाली हैं, इसके बाद इस तरह के सम्मान समारोह की तैयारियों में अगर शिक्षक व्यस्त रहेंगे तो वे विद्यार्थियों पर ध्यान कैसे दे पायेंगे! उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा इसकी अनुमति कैसे दे दी गयी!

वहीं, शिक्षकों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी को इस तरह के कार्यक्रमों की इजाजत कतई नहीं दी जाना चाहिये और अगर आयोजन हुए या हो रहे हैं तो जो भी इसका आयोजन कर रहा है उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाना चाहिये।

चर्चाओं के अनुसार शिक्षकों का सम्मान समारोह अगर आयोजित भी किया जाना आवश्यक था तो कम से कम इन आयोजनों को परीक्षाओं के संपन्न होने के उपरांत या अगले सत्र के आरंभ में करवा लिया जाता, कम से कम परीक्षाओं के ऐन पहले तो इस तरह के आयोजनों की अनुमति नहीं ही दी जाना चाहिये। वैसे शिक्षकों के सम्मान के लिये शिक्षक दिवस से बेहतर दूसरा कोई मौका नहीं हो सकता है। विभाग अगर चाहे तो शिक्षक दिवस पर इस तरह के आयोजन करवा सकता है।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि शुक्रवार को कुरई विकास खण्ड के मोहगाँव सड़क में शिक्षकों के सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। वहीं, शिक्षकों के हितों के लिये प्रतिबद्ध कर्मचारी संगठनों में भी इसे लेकर खदबदाहट आरंभ होती दिख रही है। एकाध दिन में शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी इस मसले पर जिलाधिकारी प्रवीण सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल आदि से मिलकर अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं।

 

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