अपने लाड़लों को सर्दी से बचाएं इन टिप्स के जरिए

 

बच्चों को ठंड और जुकाम लगना आम बात है और अधिकतर मां-बाप इस बात को जानते हैं। इसलिए वे पूरी कोशिश करते हैं कि वे अपने छोटे बच्चों को ठंड के प्रभाव से दूर रख सकें। लेकिन, फिर भी कभी-कभी सर्द हवायें बच्चों को परेशान कर ही जाती हैं। ऐसे में अभिभावकों का परेशान होना लाजमी है। छोटे बच्चों की सेहत को लेकर फिक्रमंद होना स्वाभाविक ही है। अगर आपका बच्चाह तीन महीने से कम उम्र का है, तो उसे ठंड लगने के लक्षण नजर आते ही डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए, लेकिन उसकी उम्र अगर तीन महीने से ज्या्दा है, तो आप शुरूआती लक्षणों में घर पर ही उसका इलाज कर सकते हैं। इसके लिए चंद घरेलू उपाय भी आजमाये जा सकते हैं।

पेट्रोलियम जैली: बच्चों की नाक पर पेट्रोलियम जैली लगायें। बच्चों की नाक पर पेट्रोलियम जैली की मोटी परत लगायें। इससे उसे काफी सुकून मिलेगा। बच्चेच की नाक जहां पर अधिक लाल और सूजी हुई हो, वहां पर जैली अधिक मात्रा में लगायें।

ह्यूमिडिफायर इस्तेसमाल करें: यह उपकरण कमरे से नमी को बाहर निकाल देता है। इससे बच्चेर की नाक की सूजन कम हो जाती है। उसके शरीर की जकड़न खुल जाती है। वह पहले से बेहतर महसूस करने लगता है। इसके साथ ही इससे उसे अच्छी नींद भी आती है।

स्टीम दिलायें

अपने बच्चे को बाथरूम में ले जायें। दरवाजा बंद रकें और गर्म पानी चला दें। 15 मिनट तक अपने बच्चे के साथ उस बाथरूम में रहें। इस बात का ख्याल रखें कि आपका बच्चा पानी से दूर रहे। आपको अपने बच्चें को केवल भाप दिलानी है। इससे बच्चे का शरीर खुलेगा और उसे आराम मिलेगा।

आराम है जरूरी: इस बात का ध्यान रखें कि आपके बच्चे को पूरा आराम मिले। संक्रमण से लड़ने के लिए इनसानी शरीर को काफी ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। अपने बच्चे को तनावपूर्ण स्घ्घ्थितियों से दूर रखें। उसके साथ आरामदेह खेल खेलें न कि बहुत अधिक एक्टिव खेल।

वेपर रब: अपने तीन महीने से अधिक आयु के बच्चे के लिए आप वेपर रब का इस्ते माल कर सकते हैं। बच्चों के लिए सुरक्षित वेपर रब का इस्तेरमाल करें। वेपर रब से बच्चेख की नाक, छाती, गला और कमर पर मालिश करें। इससे बच्चों को सुकून भी ठंडक का अहसास होता है और उन्हें सांस लेने में आसानी होती है।

बुखार से बचायें: बच्चों का बुखार दूर कम करने का प्रयास करें। अपने डॉक्टर से पूछ कर आप उसके लिए कुछ दवायें भी दे सकते हैं। याद रखें डॉक्टरी सलाह के बिना अपने बच्चे को किसी भी प्रकार की कोई भी दवा न दें। ऐसी कोई दवा बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है।

आम दवाओं से करें परहेज: अपने बच्चे को सर्दी-जुकाम के लिए मिलने वाली आम दवायें न दें। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे को तो ऐसी दवायें बिलकुल नहीं देनी चाहिये। डॉक्टर भी ऐसा करने से मना करते हैं। इन दवाओं से बच्चों को आराम तो मिल सकता है, लेकिन इनके कई प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकते हैं। इससे बच्चों के दिल पर बुरा असर पड़ता है।

अतिरिक्त तरल पदार्थ दें

अपने बच्चे को अतिरिक्त तरल पदार्थ दें। अधिक तरल पदार्थों का सेवन निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचाता है। इसके साथ ही इससे नाक स्राव भी पतला हो जाता है। छह महीने या उससे अधिक आयु के बच्चोां को सादा पानी व फलों का रस आदि दिया जा सकता है। छह महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए मां का दूध ही सर्वाेत्तम आहार है।

गर्म तरल पदार्थ पिलायें

अपने छोटे बच्चे को तरल पदार्थ गरम करके दें। अगर आपका बच्चां छह महीने से अधिक आयु का है, तो आप उसे चिकन सूप, गर्म हर्बल टी दे सकते हैं। आप चाहें तो उसे सेब का रस भी गर्म करके पिला सकते हैं। गर्म तरल पदार्थ गले में खराश व सूजन से राहत दिलाते हैं। इसके साथ कंजक्श न, दर्द और थकान को भी दूर करने में मदद मिलती है।

शहद नहीं: जब तक बच्चे की उम्र एक वर्ष न हो, उसे शहद न खिलायें। शहद का तासीर गर्म होती है और खांसी और ठण्ड् के लिए यह अचूक घरेलू उपाय माना जाता है, लेकिन वे बच्चे जिनकी उम्र एक वर्ष से कम होती है उनमें शहद इनफेंट बॉटलिज्मद नाम की बीमारी कर सकता है।

(साई फीचर्स)

 

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