फरमान तो जारी हुए पर रहे बेअसर!

 

चिकित्सकों की मश्कें कसने में नाकाम है स्वास्थ्य विभाग

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिला मुख्यालय सहित जिले में बिना रजिस्ट्रेशन चिकित्सकों की निज़ि क्लीनिक आज भी धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। बीते 08 माह पहले क्लीनिक व नर्सिंग होम संचालकों को अनिवार्य रूप से रजिर्स्टेशन कराये जाने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग ने दिये थे।

उस दौरान इस संबंध में जाँच की बात तो कही गयी थी किन्तु जाँच के 08 माह बीत जाने के बावजूद अब तक विभाग के पास कितनी क्लीनिक जिले में संचालित हैं व कितनों ने पंजीयन कराया है, इसका डाटा तक की जानकारी नहीं है। अब भी विभाग के अधिकारी जाँच करने व पंजीयन के लिये क्लीनिक संचालकों को समय देने की बात कर रहे हैं।

पिछले साल अपै्रल एवं मई माह में जिले में संचालित बिना पंजीयन व बिना डिग्री धारी चिकित्सकों की क्लीनिकों की जाँच व गड़बड़ी पाये जाने पर कड़ी कार्यवाही की बात विभागीय अधिकारियों ने कही थी। अब तक जिले में एक भी कार्यवाही सामने नहीं आयी है। सूत्रों के मुताबिक जिले में एक सैकड़ा से अधिक क्लीनिक व प्राइवेट अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इनमें से ज्यादातर बिना पंजीयन व निर्धारित नियमों के विपरीत संचालित हो रहे हैं।

इसके अलावा जिला अस्पताल में पदस्थ अधिकांश चिकित्सक अपने निवास से इतर क्लीनिक चला रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारी स्वयं मान रहे हैं कि सरकारी चिकित्सक क्लीनिक नहीं चला सकते हैं केवल मरीज़ को निःशुल्क जाँच कर परामर्श दे सकते हैं। इसके विपरीत मुख्यालय में ही अधिकांश सरकारी चिकित्सकों की क्लीनिक धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं।

हालात यह हैं कि अस्पताल में डयूटी के दौरान सरकारी चिकित्सक मरीज़ का सही तरीके से उपचार न कर उन्हें अपनी क्लीनिक में आने की बात कहते हैं। स्वास्थ्य अधिकारी को सरकारी चिकित्सकों की संचालित हो रही निज़ि क्लीनिकों के बारे में जानकारी है। इसके बावजूद वे जाँच कराने की बात कह रहे हैं।

जिला मुख्यालय सहित जिले में जगह – जगह चिकित्सकों की क्लीनिकें खुल गयी हैं। इनमें से अधिकांश चिकित्सक बिना डिग्री के हर तरह की बीमारी का उपचार कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ये हैं कि 05 से 10 साल मेडिकल दुकान में काम करने वालों ने भी क्लीनिक खोल ली हैं।

ग्रामीण इलाकों के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक नहीं होने के कारण ग्रामीण मजबूरी में बिना डिग्री धारी चिकित्सकों के यहाँ उपचार कराने मजबूर हो रहे हैं। फर्जी डिग्री के एलोपैथी उपचार करने वाले चिकित्सकों द्वारा गलत उपचार किये जाने से कई बार मरीज़ की हालत बिगड़ने के मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद ऐसे चिकित्सकों पर विभाग ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है।