अब फिल्मों की शूटिंग के जरिए एमपी की ब्रांडिंग

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। कमल नाथ सरकार अब फिल्मों के जरिए भी मध्य प्रदेश की ब्रांडिंग करेगी। इसके लिए फिल्म पर्यटन नीति 2020 तैयार की गई है।

इसमें फिल्म की शूटिंग (निर्माण) प्रदेश में करने और स्थानीय कलाकारों को मौका देने पर अनुदान दिया जाएगा। यह ढाई करोड़ रुपए तक होगा। साथ ही फिल्म में राज्य सरकार के लोगो (चिन्ह) और शूटिंग के स्थान का भी उल्लेख करना होगा। सिंगल स्क्रीन सिनेमा, बंद सिनेमाघरों को फिर से शुरू करने, मौजूदा सिनेमा हॉल को अपग्रेड करने और मल्टीप्लेक्स की स्थापना पर भी अनुदान दिया जाएगा। फिल्म सिटी, फिल्म स्टूडियो, कौशल विकास केंद्र की स्थापना में भी सरकार प्रोत्साहन देगी।

जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि पहली फिल्म की शूटिंग 50 से 75 फीसदी तक प्रदेश में करने पर एक से डेढ़ करोड़ रुपए, दूसरी फिल्म के लिए सवा करोड़ से पौने दो करोड़ रुपए और तीसरी फिल्म के लिए डेढ़ से दो करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। यदि 75 फीसदी से अधिक फिल्म की शूटिंग प्रदेश में की जाती है और यहां के स्थलों को प्रमुखता से दिखाया जाता है तो 50 लाख रुपए अतिरिक्त राशि दी जा सकेगी। इसका फैसला फिल्म फेसिलिटेशन सेल करेगी। टीवी सीरियल और डाक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए भी अनुदान दिया जाएगा। फिल्म सिटी, स्टूडियो निर्माण और उपकरणों के लिए एक से पांच करोड़ रुपए तक अनुदान मिलेगा।

नीति में प्रदेश को पर्यटन को प्रोत्साहित करने कई और प्रावधान भी किए गए हैं। बैठक में सिंगरौली हवाई अड्डे की जगह अब हवाई पट्टी का निर्माण करने का निर्णय लिया गया। इसमें दो हेलीपैड, एक हैंगर, प्रशासनिक भवन और स्टाफ क्वार्टर भी बनाया जाएगा। इसमें जनभागीदारी से 18.75 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। जबकि 16.75 करोड़ रुपए खनिज निधि से खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने 31 दिसंबर तक निर्माण कार्य हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि रखरखाव का काम निजी कपंनियां ही करेंगी।

एक दिन में मिलेंगी 25 अनुमतियां : निवेश को बढ़ावा देने और उद्योग मित्र माहौल बनाने के लिए देश में पहली बार एक दिन में 25 अनुमतियां और लाइसेंस ऑनलाइन दिए जाएंगे। इसके लिए कैबिनेट ने मध्यप्रदेश टाइम बॉन्ड क्लीयरेंस एक्ट के मसौदे को मंजूदी दे दी। अब विधेयक विधानसभा के बजट सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। समयसीमा में यदि स्वीकृतियां नहीं दी जाती हैं तो इन्वेस्ट पोर्टल से स्वतः डीम्ड अनुमतियां जारी हो जाएंगी। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।

एक से 15 दिन में मिलेंगी अनुमतियां : टाइम बॉन्ड क्लीयरेंस अधिनियम में उद्योगों को अनुमतियां व लाइसेंस एक से 15 दिन में मिलेंगी। 25 अनुमतियां व लाइसेंस एक दिन में मिलेंगे। वहीं, 10 अनुमतियां ऐसी हैं जो सात दिन और पांच मामलों के लिए अधिकतम समयसीमा 15 दिन तय किए गए हैं। यह सुविधा उद्योग, लघु उद्योग, आईटी और पर्यटन के क्षेत्र में निवेश करने वालों को मिलेगी।