श्रोताओं को जमकर लोटपोट किया कवियों ने अपनी प्रस्तुति से

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिस देश में साहित्य जिंदा रहता है वह देश कभी मर नहीं सकता। सिवनी एक ऐसा स्थान है जहाँ पर आज़ादी के आंदोलन में न केवल अनेकों बार जेल यात्रा करने वाली अमर कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की अंतिम पुण्य भूमि रही है।

उक्त उदगार स्वामी बलवंतानंद महाराज ने कवि सम्मेलन के पूर्व अपने संबोधन में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि सुभद्रा कुमारी चौहान की हमेशा यही इच्छा रही कि उनके मरने के बाद उनकी समाधि पर हर बरस मेला भरता रहे। इसी बात को मोहन चंदेल द्वारा साकार करते हुए प्रतिवर्ष कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। निश्चित ही यह आयोजन हमारे समाज को दिशा एवं दशा देने का कार्य करता आया है।

इस कार्यक्रम में बीना के सुनील समैया, छपारा के मुकेश मनमौजी, बालाघाट की शबनम, रायपुर के रमेश विश्वहार, सिवनी के जगदीश तपिश, नसीम अख्तर, राजनांदगाँव की कवियित्री उपस्थित रहीं। रात्रि के तीसरे पहर तक चले इस आयोजन में हास्य व्यंग्य, वीर रस, श्रृंगार एवं अन्य विधाओं के अंतर्गत नवरस की बरसात होती रही।

रायपुर के रमेश विश्वहार ने कहा सेहत से मैं जवान था 70 का हो गया। आंधी से ऊड़ाये हुए छप्पर सा हो गया। दुनिया के झूठे प्यार ने इतना छला मुझे मिट्टी सा कलेजा था जो पत्थर सा हो गया। छपारा के मुकेश मनमौजी ने कहा नेता वे विषधर सारे खादी के पोशाक में बसते जो उन्हें दूध पिलाता सबसे पहले उसे डंसते। वरिष्ठ कवि जगदीश तपिश ने कहा कि आग लगा के देश जलाना अब ऐसी नादानी छोड़ो, लोकतंत्र का सही अर्थ है लोग से अपना नाता जोड़ो।

इसी कड़ी में राजस्थान के खिलचीपुर के नवोदित ओज के कवि फैजान हिन्दुस्तानी ने कहा पाक न जाकर पूर्वजों ने यहाँ रहना स्वीकार किया पर तुमने देश से गद्दारी की तुमने पाक से प्यार किया। तुम में खून नहीं पुरखों का और आबाद नहीं हो तुम, ऐसा लगता अपने बाप की भी औलाद नहीं हो तुम।

बालाघाट की लता शबनम ने कहा तलवार तीर और न त्रिशूल बेचिये, नफरत के जहर वालों न उसूल बेचिये। हम अमन पसन्द लोग हैं। बस्तियां हमारी धंधा चलेगा खूब यहाँ फूल बेचिये। श्रृंगार की कवियित्री राजनांदगाँव से आयीं रचना वैष्णव ने कहा कदमों के तेरे छूते ही कुंदन बना दिया। बहते हुए अशकों को भी शबनम बना दिया। हर पल तेरी बातों को याद करते रहे हम देकर स्थान दिल में, मुझे धड़कन बना दिया।

राष्ट्रीय कवि खरगौन निवासी डॉ.शम्भू सिंह मनहर ने कहा मनुज तो छोड़िये ये देव धड़कन से भी पावन है करें क्या वंदना इसकी ये वन्दन से भी पावन है, लगा लें हम इसे माथे निगाहों में इसे भर लें, हमारे देश की मिट्टी ये चंदन से भी पावन है। सिवनी के नसीम असर ने कहा कोई हमदर्दी का अहसास मुहब्बत न रही, जैसे इंसान को इंसा की आवश्यकता न रही, खैरियत पूछ ली जाती है, मोबाईल में जनाब अब तो बीमार से मिलने की भी फुर्सत न हुई।

खातेगाँव टीव्ही एंकर मुकेश जोशी मासूम ने कहा कोई जादू कोई मंतर कोई टोना नहीं होता, बुजुर्गाें की दुआओं से कोई बड़ा सोना नहीं होता। मेरे सिर पर हमेशा हाथ रहता है, मेरी माँ मेरे घर में मुसीबत का कोई कोना नहीं होता, हास्य के हस्ताक्षर बीना के सुनील समैया ने कहा बनते हैं थान जो कभी टुकड़ेल रहे हैं, बनते हैं तोप, जो कभी गुलेल रहे हैं, बहुरूपिये बने तो कला सीख गये वो देशी घी बन गये, जो कभी तेल रहे हैं।

इस अवसर पर पूर्व विधायक रजनीश सिंह, जिला काँग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष असलम खान, जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष शिव सनोडिया, अरविंद मानव, रमेश श्रीवास्तव, मिनाज कुरैशी, सूफी रियाज निदा, डॉ.राम कुमार चतुर्वेदी, पूर्व न्यायाधीश प्रवीण शाह, एडव्होकेट अखिलेश यादव, गणेश गुप्ता, अमर विद्रोही, संजय जैन संजू, मनीष जैन, धनंजय चंदेल, श्रीमति आशा चंदेल, तृप्ति नामदेव सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम के प्रारंभ में नगर के साहित्यकार जगदीश तपिश, नसीम असर का आयोजन समिति द्वारा सम्मान किया गया।