शिवोपासना में बेलपत्र का विशेष महत्व

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। महा शिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इसमें भगवान शिव के निमित्त विशेष पूजा, अर्चना, जाप अनुष्ठान रुद्राभिषेक आदि किया जाता है। इसके अलावा शिवोपासना में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है।

मराही माता स्थित कपीश्वर हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी उपेंद्र महाराज ने बताया कि शिव पुराण में कहा भी गया है, त्रि दलम त्रि गुणाकारम, त्रिनेत्रम च त्रायुधम! त्रि जन्म पाप संहारम, एक बिल्व शिवार्पणम!! अर्थात तीन दलों से युक्त एक बिल्व पत्र जो हम भगवान शिव को अर्पण करते हैं, वह हमारे तीन जन्मों के पापों का नाश करता है।

उन्होंने बताया कि शिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक और भगवन शिव की पूजा से कालसर्प योग की शांति होती है जिन लोगों को मानसिक अस्थिरता, तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो उनके लिये महा शिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव का श्रद्धा पूर्वक किया गया अभिषेक अत्यंत शुभ और सकारात्मक परिणाम प्रदान करता है।

मनोकामना पूर्ति के लिये इन वस्तुओं से करें शिवलिंग का अभिषेक : स्वास्थ्य और समृद्धि के लिये पंचामृत (दूध, दही, बूरा, शहद, मक्खन) से अभिषेक करें। धन प्राप्ति के लिये गन्ने के रस से अभिषेक करें। शत्रु बाधा मुक्ति के लिये सरसों के तेल से अभिषेक करें। मानसिक एकाग्रता के लिये दूध से अभिषेक करें।

वर प्राप्ति के लिये केशर युक्त जल से अभिषेक करें। पत्नि प्राप्ति के लिये दही से अभिषेक करें। सर्वसिद्धि के लिये गंगाजल से अभिषेक करें। कालसर्प योग की शांति के लिये काले सफ़ेद तिल और चन्दन युक्त जल से अभिषेक करें। साढ़े साती के लिये काले तिल युक्त जल से अभिषेक करें।