अब बच्चे पढ़ाई के साथ संगीत और फैशन डिजाइनिंग भी सीखेंगे

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। निजि स्कूल की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ अतिरिक्ति गतिविधियों से जोड़ने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा रहा है। इससे बच्चे विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से भी जुड़ेंगे।

प्रदेश के 09 हजार शासकीय हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों में पढ़ाई के साथ अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान की वार्षिक कार्य योजना के तहत प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में यूथ एंड ईको क्लब बनाए जाएंगे।

इस क्लब के तहत स्कूलों में बच्चों को व्यक्तित्व विकास, संगीत, फैशन डिजाइनिंग, आर्ट एंड क्रॉफ्ट, वाद-विवाद, खेलकूद, पॉवर योगा जैसी गतिविधियां कराना अनिवार्य होगा। इससे बच्चों में जीवन जीने का कौशल, आत्म सम्मान और आत्म विश्वास पैदा होगा। साथ ही बच्चों में पढ़ाई का दबाव भी नहीं रहेगा। इसके लिए स्कूलों को बजट भी मिलेगा।

क्लब कराएगा कई गतिविधियां : यूथ क्लब के माध्यम से विभाग के कैलेंडर के अनुसार क्विज, डिबेट, सांस्कृतिक गतिविधियां, खेलकूद, पुस्तकालय व प्रयोगशाला का उपयोग सुनिश्चित करना होगा। साथ ही ईको क्लब बच्चों को पर्यावरण गतिविधियों में भाग लेने एवं पर्यावरण के बारे में समझ विकसित करने का माध्यम बनेगा। इससे बच्चे अपने अभिभावक, पड़ोस व समुदाय को पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकेंगे।

रचनात्मक गतिविधि से जुड़ेंगे बच्चे : यह क्लब स्कूलों में साफ-सफाई, बच्चों के नाखून, बाल आदि की स्वच्छता के लिए जागरूकता कार्यक्रम और प्रार्थना सभा में जांच करेगा। इस क्लब की ओर से खेल व शारीरिक गतिविधियों का आयोजन करवाया जाएगा। इसमें योग, ड्रामा, वाद-विवाद, सांस्कृतिक गतिविधियां, भाषण, निबंध लेखन, पत्र लेखन, पोस्टर मेकिंग, साहित्यिक व सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का मौका मिलेगा।

प्रत्येक क्लब में होंगे 20 सदस्य : प्रत्येक स्कूल में यूथ एंड ईको क्लब का गठन प्राचार्य करेंगे। वे क्लब के प्रभारी होंगे। क्लब के लिए स्कूल का एक शिक्षक नोडल अधिकारी होगा, जो क्लब की गतिविधियों का समन्वय करेंगे। प्रत्येक क्लब में 20 सदस्य होंगे। छात्र और छात्राओं की संख्या बराबर रहेगी।

स्कूलों में क्लब गठित होने से बच्चे विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से जुड़ेंगे। इससे बच्चों में रचनात्मकता आएगी।

जयश्री कियावत,

आयुक्त,

लोक शिक्षण.

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