चमचमाती इमारत वाले अस्पताल में प्रसूता व गर्भस्थ शिशु की गयी जान!

 

भवन तो लकझक दिख रहे लेकिन व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने आ रहा पसीना!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। लगभग आठ माह में इंदिरा गांधी जिला अस्पताल की सूरत तो लकझक हो गयी है, पर व्यवस्थाएं दिनों दिन पटरी से उतरती ही नज़र आ रही हैं। एक के बाद एक विवादित वाकयों के बाद अब एक 24 वर्षीया प्रसूता और उसके गर्भ में एक नवजात की मौत का मामला प्रकाश में आया है।

जिला अस्पताल के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बृहस्पतिवार और शुक्रवार की दरमियानी रात में जिला अस्पताल में लखनवाड़ा थाना के पिपरिया गाँव की एक महिला संतोषी पति दीपक सतनामी भर्त्ती थी। महिला के गर्भ में जुड़वा बच्चे थे। महिला को मध्य रात्रि के आसपास प्रसव पीड़ा आरंभ हुई और उसने एक बच्ची को जन्म दिया।

सूत्रों का कहना है कि इसके उपरांत दूसरे बच्चे के लिये दर्द उठने का इंतजार वार्ड में तैनात कर्मचारियों के द्वारा किया गया, इसके बाद दर्द नहीं उठा तो कर्मचारी भी विश्राम के लिये चले गये। रात को ही महिला और उसके गर्भ में पल रहे दूसरे शिशु की मौत हो गयी।

सूत्रों की मानें तो सुबह जब इस बात की जानकारी महिला के परिजनों को दी गयी तो वे आक्रोशित हो उठे। उनके द्वारा इस बात की जानकारी जिलाधिकारी प्रवीण सिंह को भी दी गयी। जिलाधिकारी ने उन्हें मिलने के लिये बुलाया पर परिजन उनसे मिलने नहीं पहुँच पाये।

सूत्रों ने आगे बताया कि देर रात डॉ.श्रीमति बांद्रे को कॉल भेजा गया था, किन्तु उन्होंने आने में काफी देर की। जब डॉ.श्रीमति बांद्रे प्रसूति प्रभाग पहुँचीं तब तक महिला दम तोड़ चुकी थी। इसके साथ ही उसके गर्भ में पल रहा दूसरा बच्चा भी महिला के साथ ही इस संसार में आने के पहले ही दम तोड़ चुका था। इसके पहले प्रसव के दौरान हुई पुत्री की नाज़ुक अवस्था को देखते हुए उसे एसएनसीयू वार्ड में भर्त्ती करवा दिया गया।

सूत्रों की मानें तो इस बात की जानकारी जैसे ही अस्पताल प्रबंधन को लगी, प्रबंधन हरकत में आया और इस मामले में लीपा पोती की तैयारियां आरंभ कर दी गयीं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के द्वारा आनन फानन ही एक आपात बैठक बुलायी गयी और महिला की मौत के कारणों को जानने की कोशिश की गयी।

सूत्रों ने बताया कि इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर आते ही अस्पताल प्रबंधन के पास मीडिया के फोन आना आरंभ हुए। प्रबंधन के द्वारा किसी को हीमोग्लोबिन कम होने, किसी को हृदयाघात से मौत, किसी को प्रीमेच्योर डिलेवरी की बात कही जाती रही।

इस बात की जानकारी जैसे ही अस्पताल प्रबंधन को लगी, मामले में लीपापोती की शुरुआत हो गयी। आनन फानन में अस्पताल प्रबंधन ने स्टाफ और संबंधित चिकित्सक और अधिकारियों की मींिटंग बुलायी जिसमें महिला की मौत के कारणों की समीक्षा की गयी। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि महिला काफी कमजोर थी, जिसके कारण हृदयाघात से उसकी मौत हो गयी।

नहीं कराया शव परीक्षण! : सूत्रों ने यह भी कहा कि फिलहाल की परिस्थितियों के हिसाब से महिला की मौत को असामान्य मौत माना जा सकता है। इस लिहाज़ से अस्पताल प्रबंधन को महिला का शव परीक्षण कराया जाना चाहिये था, जो नहीं करवाया गया। प्रबंधन के द्वारा बिना शव परीक्षण कराये ही महिला के शव को उसके परिजनों को सौंप दिया गया।