अन्य प्रदेशों के अपराधियों की सिवनी पर नज़र!

 

(शरद खरे)

लगातार ही कुछ दिनों से अन्य प्रदेशों के जरायमपेशा लोगों की नज़रें सिवनी पर पड़ती दिख रही हैं। मामला चाहे एटीएम काटकर पैसे निकालने का हो या फिर हाल ही में कंटनेर से मोबाइल चोरी की वारदात का, दोनों ही मामलों में घटनास्थल सिवनी ही दिख रहा है। अगर यह संयोग या दुर्योग है तो कोई बात नहीं, पर अगर जान बूझकर इस तरह की हरकत की जा रही है तो यह चिंता की बात मानी जा सकती है।

जनवरी माह में छिंदवाड़ा रोड पर एक एटीएम काटकर उससे लगभग पौने आठ लाख रूपये चुरा लिये गये थे। पुलिस को इस घटना को कारित करने वाले आरोपियों का सुराग मिला, कुछ आरोपी पुलिस ने धर दबोचे पर अभी भी इसके अनेक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर ही हैं। इसके आरोपी हरियाणा और दिल्ली एनसीआर के आसपास के बताये जा रहे हैं।

इसके अलावा हाल ही में मोबाइल ले जा रहे एक कंटेनर से मोबाइल चोरी का मामला प्रकाश में आया। इस पूरी घटना की पटकथा जिस तरह से और जिसने भी लिखी थी, उसके द्वारा सिवनी का चयन कंटेनर को पंचर करने के लिये क्यों किया गया, यह पुलिस के अन्वेषण का विषय होना चाहिये। हो सकता है पुलिस इस दिशा में आरोपियों से पूछताछ भी कर रही हो। सारे मामले का खुलासा पुलिस की जाँच पूरी होने पर ही हो सकता है।

पत्रकार वार्ता में पुलिस ने बताया कि इस कंटेनर के साथ एक अन्य कंटेनर चल रहा था, जिसमें इन मोबाइल के बक्सों को चुराकर रखा गया था। इस कंटेनर का ताला तेलंगाना के कामारेड्डी स्थित आरटीओ जाँच चौकी में टूट गया था। अगर ऐसा था तो निश्चित तौर पर सिवनी पहुँचने के पहले ही मोबाइल के बक्सों को दूसरे कंटेनर में किसी वीरान जगह पर आरोपियों के द्वारा रखा गया होगा, फिर सिवनी में यह सब स्वांग रचने का क्या कारण हो सकता है!

इसके पहले भी मध्य प्रदेश के बाहर से आकर अपराधियों के द्वारा सिवनी में वारदात किये जाने की बातें प्रकाश में आती रही हैं। पुलिस के आला अधिकारियों को इस बात पर विचार अवश्य करना चाहिये कि क्या जरायमपेशा लोगों के लिये सिवनी, सॉफ्ट टारगेट बन चुका है! पुलिस के आला अधिकारियों को पुलिस के खुफिया तंत्र और थानों के सूचना संकलन को एक बार फिर से रिव्यू करने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

सिवनी में किरायेदारी के सत्यापन के लिये निर्देश तो जारी होते रहे हैं, पर इस मामले में बात सिर्फ और सिर्फ निर्देश पर जाकर ही अटक जाती है। इसको अमली जामा पहनाया गया अथवा नहीं, यह देखने की फुर्सत किसी भी अधिकारी को नहीं है। हो सकता है कि इसका लाभ उठाकर जरायमपेशा लोगों के द्वारा सिवनी आकर यहाँ रैकी कर वारदातों को अंजाम दिया जा रहा हो! इसलिये जिला पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक से जनापेक्षा है कि वे जिले में पटरी से उतर रही पुलिस व्यवस्था को चाक चौबंद बनाने की दिशा में पहल अवश्य करें।