असामाजिक तत्वों का बोलबाला है अस्पताल में!

 

सुरक्षा कर्मियों का अस्पताल में नहीं है अता पता

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में भवनों को तो रंग रोगन करके सुधारा जाकर भवन को तो नया लुक प्रदान कर दिया गया है पर अस्पताल के अंदर की अव्यवस्थाओं पर अब तक लगाम नहीं लगायी जा सकी है। आलम यह है कि चिकित्सालय में असामाजिक तत्व, आये दिन गुण्डागर्दी करते दिख जाते हैं और सुरक्षा कर्मी मौके से गायब ही मिलते हैं।

मरीज़ों के अनुसार दिन रात चिकित्सालय में आवारा असामाजिक तत्वों का जमावड़ा जमकर रहता है। इन तत्वों की हरकतों से चिकित्सालय में पेरा मेडिकल स्टॉफ भी बुरी तरह परेशान ही नज़र आता है। बताया जाता है कि चिकित्सालय में आये दिन शोहदों, असामाजिक तत्वों की भीड़ देखी जा सकती है। जिला चिकित्सालय को पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है। इन कैमरों का कंट्रोल रूम कहाँ है, इनका अधीक्षण (सुपरविजन) कौन करता है, इस बारे में भी कोई नहीं जानता है।

शाम को जब ओपीडी समाप्त हो जाती है, उसके बाद चिकित्सालय के वार्ड और कॉरीडोर में बिना काम के युवाओं, शराबियों की टोली बैठी देखी जा सकती है। यही आलम चिकित्सालय परिसर का है। कोतवाली पुलिस के द्वारा यदा – कदा अस्ताल परिसर में जाकर तलाशी अभियान की रस्म अदायगी अवश्य की जाती है।

बताया जाता है कि ओपीडी के समाप्त होने के बाद चिकित्सालय के वार्ड में या परिसर में सुरक्षा कर्मियों को अक्सर ही नदारद पाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग का प्रशासन अगर चाहे तो सीसीटीवी कैमरों (अगर चालू हालत में हैं तो) के फुटेज से इस बात की पुष्टि की जा सकती है। लोगों का कहना है कि जब सुरक्षा कर्मी चिकित्सालय में रहते ही नहीं हैं तो लाखों रुपये प्रतिमाह निज़ि कंपनी को देना बेमानी ही है।

ज्ञातव्य है कि कुछ माह पहले रात के समय किसी बाहरी व्यक्ति के द्वारा एक चिकित्सक की उपस्थिति में अस्पताल के इमरजेंसी प्रभाग में एक गार्ड के साथ मारपीट भी की गयी थी। इतना ही नहीं, इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें चिकित्सक भी गार्ड को अपशब्द कहते दिख रहे थे।

अस्पताल के सूत्रों के अनुसार इस मामले में अस्पताल प्रशासन के द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से क्या कदम उठाये गये, इस बात को भी शायद ही कोई जानता हो, क्योंकि इस वीडियो में यह भी दिखायी दे रहा था कि जब बाहरी व्यक्ति के द्वारा गार्ड के साथ मारपीट की जा रही थी उस समय दूसरा गार्ड हाथ पर हाथ बांधे सारी गतिविधियों को मूकदर्शक बना देख रहा था। इस मामले में की गयी कार्यवाही सार्वजनिक की जाना आवश्यक है।