सिवनी में भी हैं तेल के कुएं!

 

जमकर हो रही ब्रांडेड तेल की पैकिंग

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी के बाज़ार में भी नकली खाद्य तेल की पदचाप सुनी जा रही है। खाद्य विभाग की अनदेखी के चलते सिवनी में भी छिंदवाड़ा की तर्ज पर नकली तेल को ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग में बेचे जाने की चर्चाएं तेजी से चल रहीं हैं। इस व्यवसाय से मध्य प्रदेश के सरकारी खज़ाने में लाखों रुपये महीने की चपत आसानी से लगायी जा रही है।

सिवनी के बाज़ार में चल रहीं चर्चाओं के अनुसार बुधवारी बाज़ार और शंकर मढ़िया कि आसपास ही बड़ी तादाद में तेल के टैंकर्स खाली किये जाते हैं। इस खुले तेल से ब्रांडेड कंपनियों के तेल के पाँच से पंद्रह लीटर के कंटेनर्स तैयार कर पैक बंद कर बाज़ार में बेचा जाता है। एक तेल व्यवसायी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी में अभी एक लीटर के पॉलीपेक की मशीन नहीं आयी है।

व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि सिवनी के बाज़ार में खुला तेल नागपुर और महाराष्ट्र के अन्य प्रदेशों से दो नंबर में टैंकर्स के माध्यम से पहुँच रहा है। सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि महाराष्ट्र से तेल बुलाने पर तीन प्रतिशत वेट देना होता है, जबकि अगर प्रदेश से ही तेल खरीदा जाये तो वेट दो प्रतिशत ज्यादा यानि पाँच प्रतिशत लगता है। सूत्रों ने कहा कि महाराष्ट्र से यह तेल दो नंबर में ही आता है, किन्तु वहाँ के थोक तेल व्यापारी इसमें वेट जोड़कर ही सिवनी भेजते हैं।

सूत्रों ने बताया कि सिवनी में सोयाबीन के नाम से बिकने वाले तेल में कॉटन (रूई) वाले तेल आदि की मिलावट की जाती है। सूत्रों की मानें तो सिवनी में बिकने वाले तेल में पाँच से पंद्रह लीटर के कंटेनर्स में इस तरह की मिलावट सबसे अधिक की जा रही है।

सूत्रों ने यह संकेत भी दिये कि इस तरह का दो नंबर का काम करने वाले व्यवसायियों द्वारा खाद्य विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, विक्रय कर विभाग आदि संबंधित विभागों को समय – समय पर पर्याप्त मात्रा में चौथ दी जाती है जिसके चलते लंबे समय से तेल के कंटेनर्स की जाँच का काम भी नहीं किया गया है।

सूत्रों की मानें तो प्रत्येक माह इस तरह का लाखों लीटर तेल सिवनी के बाज़ार में खप रहा है। इसके चलते शासन के राजस्व को सीधे – सीधे लाखों रूपयों की क्षति का सामना तो करना ही पड़ रहा है, साथ ही साथ इस तरह के अघोषित तेल के कुओं के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।