चायनीज़ आइटम न आने से पिचकारी पर लगा मंहगाई का तड़का

बीस से तीस फीसदी आया दामों में उछाल!
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। होलाष्टक आरंभ होते ही रंगों के पर्व होली का आगाज़ हो गया है। इसके साथ ही लोगों पर होली का सुरूर भी चढ़ता दिख रहा है। इस बार कोरोना वायरस के कारण चायनीज आइटम न आने के कारण रंग और पिचकारी पर भी महंगाई का तड़का लगता दिख रहा है।
बाज़ार में अब तक रंग, गुलाल, पिचकारी आदि की दुकानें उस तरह नहीं सज पायी हैं, जिस तरह पहले सज जाया करती थीं। कहीं – कहीं दुकानें सजती अवश्य दिख रही हैं। इस बार होली पर पिचकारी में वेरायटीज की कमी देखी जा सकती है।
लगातार बढ़ रही महंगाई और चीन में कोरोना वायरस के असर के कारण भारत के व्यापारियों ने चीन से होली से संबंधित आइटम नहीं बुलाये हैं। पिछली बार बुलायी गयी सामग्री में जितने सामान बच गये थे, उन्हें ही व्यापारियों के द्वारा छोटे व्यापारियों को बेचा जा रहा है। इस बार पिचकारी के दामों में बीस से तीस फीसदी की बढ़ौत्तरी दर्ज की गयी है।
पिस्टल से लेकर गन तक की पिचकारी : देश में दिन दोगुनी रात चौगुनी बढ़ रही महंगाई का भारी असर इस बार रंगों के त्यौहार की सामग्री पर भी पड़ेगा। इस बार पिचकारी से लेकर अबीर तक कीमतों में 20 से 30 फीसदी तक की वृद्धि देखने को मिल रही है। इसका सबसे बड़ा कारण चीन से आवश्यक सामग्री की आवक का कम होना है।
पिचकारी विक्रेता प्रकाश गेलानी का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से हाल में वहाँ से आने वाली पिचकारी, अबीर व रंगों का आयात ठप्प है। बाज़ार में जो भी चाइनीज उत्पाद आ रहे हैं वह वायरस फैलने के पहले ही आ गये थे। बावजूद इसके लोगों में इसके प्रति कुछ शंकाएं हैं लिहाज़ा बिक्री कमजोर है।
उनका कहना है कि इस बार पिचकारी की कीमतें 20 से 25 फीसदी और अबीर की कीमतें 25 फीसदी तक बढ़ी हुई हैं। रंग पर उतनी महंगाई नहीं आयी। होली की सामग्री की कीमतों में हुई वृद्धि का एक कारण जहाँ आयात में कमी को मानते हैं वहीं सबसे बड़ा कारण सरकार की नीतियां भी हैं।
होली खेलने टी-शर्ट से मुखौटे तक बाज़ार में : होली में आकर्षक और भयानक दिखने वाले मुखौटे लगाकर अपने साथी को डराने का चलन पुराना है जिसको लेकर इस बार भी बाज़ार में तरह – तरह के मुखौटे देखने को मिल रहे हैं। इसके अलावा रंग बिरंगी टोपियां भी ग्राहक का इंतजार कर रही हैं। बाज़ार में इस बार रंग खेलने के लिये पहली बार टी-शर्ट भी आयी है जो है तो सफेद रंग की पर उसमें हैप्पी होली लिखा हुआ है। इसकी कीमत डेढ़ सौ रुपये के आसपास है।
जैसा पंसद हो वैसा हथियार खरीदिये : हालांकि पिछले सालों में भी पिस्टल रूपी पिचकारी मिलती रही हैं लेकिन बचपन के दिलो दिमाग पर कब्जा जमा रही हिंसा अब भाई चारे को बढ़ाने वाले होली जैसे त्यौहारों पर भी साफ दिख रही है। इस बार बाज़ार में परंपरागत पाइपरूपी प्लास्टिक की छोटी – बड़ी पिचकारियां भी उपलब्ध हैं। इनकी कीमतें 10 से 100 रुपये तक हैं।
कुछ पिचकारियां बोतल और सिलेण्डर टाइप की हैं। इनकी क्वालिटी कुछ अच्छी है लिहाज़ा इनका उपयोग होली के बाद पौधौं में पानी की धार छोड़ने के साथ ही घर में मच्छर मार दवा डालने के लिये भी हो सकता है। इनकी कीमत 80 से 130 रुपये के बीच है।
बाज़ार में बड़ी मशीनगन, प्रेशर गन देशी पिचकारियों की भी भरमार है। इनकी कीमतें 100 रुपये लेकर हज़ार रुपये तक हैं। इनके लिये अधिकांश बच्चों में दीवानगी दिखती है। इनके अलावा पेटन टैंक, माउजर, एके 47 जैसे हथियारों जैसी दिखने वाली पिचकारियां भी उपलब्ध हैं जिनकी कीमतें भी 10 रुपये से दो सौ रुपये के बीच हैं।