ट्रक से मिले नवाबकालीन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के कोर्ट ने दिए निर्देश

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश के भोपाल में एक ट्रक से बरामद नवाबकालीन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के निर्देश जिला अदालत ने राज्य संग्रहालय को दिए हैं। ट्रक 18 फरवरी को क्राइम ब्रांच ने पकड़ा था। इन दस्तावेजों में अहम जानकारियां हैं। दस्तावेजों में नवाब सिकंदर जहां बेगम की बेटी शाहजहां बेगम (1868-1901) से लेकर नवाब हमीदुल्ला खान (1894-1960) तक के भोपाल रियासत का मसौदा भी मिला है।

शाहजहां बेगम के बारे में पुरातत्वविदों का कहना है कि उन्हें इमारतें बनवाने का शौक था। इसी के चलते उन्होंने भोपाल रियासत की बागडोर संभालने के बाद लालकोठी का निर्माण करवाया था। यह लालकोठी आज राजभवन के नाम से जानी जाती है। उस समय यह कोठी पॉलीटिकल एजेंटों को ठहराने के लिए बनवाई गई थी। शाहजहां बेगम ने एक ताजमहल का भी निर्माण करवाया था। उन्होंने ने ही नूर मस्जिद, बेनजीर मंजिल, नूर महल, निशात मंजिल, नवाब मंजिल, आली मंजिल सहित अन्य इमारतें बनवाई थीं।

इसके अलावा उन्होंने 1882 ईसवी में डाक व्यवस्था शुरू की थी। यह उस समय के सबसे उन्न्त डाक व्यवस्था थी। इसमें डाक सेवा से जुड़े लोग न केवल पत्र को इधर से उधर तक ले जाते थे, बल्कि खुफिया एजेंट की तरह काम भी करते थे। हालांकि यह तथ्य हयाते-शाहजहांनी में भी मिलते हंै। नवाब कालीन दस्तावेजों मंे भी इसका जिक्र है। ताजुल मस्जिद भी शाहजहां बेगम के शासनकाल में बनवाई गई थी। ट्रक में दस्तावेज मिलने के मामले में एंटी क्वीटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। इसकी सुनवाई कोर्ट में चल रही है।

एनआरआई कॉलोनी वाली जमीन भी नवाब संपत्ति का का हिस्सा

नवाब की संपत्ति में सरकारी उपक्रम हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी भी बनाई गई। यह नवाब संपत्ति में शामिल खसरा नंबर 52 की 16 एकड़ जमीन पर थी। वर्तमान में यहां एनआरआई कॉलोनी भी है। 2008 में तत्कालीन तहसीलदार राजेंद्र पवार ने इसका नामांतरण भी कर दिया। वहीं, इस 72 एकड़ जमीन के अब तक कई टुकड़े हो चुके हैं। 12 नामांतरण तो 2008 में ही हो गए थे। सैफिया कॉलेज के चैयरमैन जैनुद्दीन शाह ने इस संबंध में आपत्ति भी लगाई है। खसरा नंबर 52 की जांच के लिए कलेक्टर भोपाल से शिकायत भी दर्ज कराई है।