शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं जिचि में!

 

 

जिला चिकित्सालय में मरीज़ को दाखिल करवाने के बाद पेयजल के लिये बाहरी साधनों पर ही निर्भर होना पड़ता है। इसी तरह की व्यवस्था से मुझे शिकायत है।

 गर्मिंयों का मौसम आरंभ हो चुका है और तापमान बढ़ता हुआ प्रतीत हो रहा है। इस मौसम में मरीज़ों को पेयजल के लिये परेशान न होना पड़े इसके लिये विशालकाय जिला चिकित्सालय में एक भी ढंग का बोर नहीं है जो जल की आपूर्ति निर्बाध तरीके से कर सके। बोर, यदि होगा भी तो वह मरीजों या उनके परिजनों की पहुँच में तो कतई नहीं दिखता है।

जिला चिकित्सालय में इस संबंध में कोई जानकारी भी उपलब्ध नहीं रहती है कि मरीज़ों को शुद्ध पेयजल कहाँ से उपलब्ध हो सकेगा। ओपीडी के समीप पेयजल की व्यवस्था अवश्य की गयी है लेकिन वहाँ से लिये गये पेयजल को देखकर कोई भी बता सकता है कि वह पूरी तरह से शुद्ध है अथवा नहीं, स्वाद की बात तो अलग ही है जो कुछ-कुछ कड़वा लगता है।

जिला चिकित्सालय प्रांगण में रात के समय शराबखोरी करते हुए नशेड़ियों को सहज ही देखा जा सकता है। इन शराबियों के द्वारा इसी स्थान से बोतल में पानी भरा जाता है। शराबियोें को इस बात से कोई लेना-देना नहीं दिखता है कि उनके द्वारा जो पानी बोतल में भरा जा रहा है वह वास्तव में शुद्ध पेयजल है अथवा नहीं लेकिन मरीज़ों को तो इससे सरोकार होता ही है लेकिन इस ओर शायद जिला चिकित्सालय प्रबंधन ध्यान नहीं दे पा रहा है।

देखा जाये तो जिला चिकित्सालय से चंद कदमों की दूरी पर ही पानी की टंकी स्थित है जो आसानी से जिला चिकित्सालय प्रबंधन को जिला चिकित्सालय से भी दिखायी पड़ती होगी। उसके बाद भी शुद्ध पेयजल न मिलने के कारण लोगों को प्रांगण के बाहर स्थित दुकानों से खरीदकर ही पानी लेना पड़ता है।

ऐसे में जिला चिकित्सालय प्रबंधन से अपेक्षा ही की जा सकती है कि वह अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करे और जिला प्रशासन से भी अपील है कि उसके द्वारा इस बात पर नजर रखी जाये कि जिला चिकित्सालय प्रबंधन व्यवस्था सुधारने में दिलचस्पी दिखा भी रहा है या नहीं अन्यथा इसके अभाव में कोई ठोस कदम उठाये जायें ताकि जिला चिकित्सालय पहुँचने वाले लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।

प्रतीक भारद्वाज